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एआई के दौर में रोजगार के लिए नई तकनीक और कौशल जरूरी : डॉ. विपिन खुराना

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एआई के दौर में रोजगार के लिए नई तकनीक और कौशल जरूरी : डॉ. विपिन खुराना


बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में नॉलेज शेयरिंग प्रोग्राम, 209 शिक्षकों-विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

झांसी, 23 अक्टूबर (हि.स.)।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच रोजगार के बदलते स्वरूप के अनुरूप नई तकनीक और कौशल विकसित करना जरूरी है। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देने के बजाय वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। यह बात बेंगलुरु से आए विशेषज्ञ डॉ. विपिन खुराना ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित नॉलेज शेयरिंग प्रोग्राम में कही।

विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी एवं आईसीएफएआई बिजनेस स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में 48 शिक्षक और 161 विद्यार्थी समेत 209 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। शिक्षकों के सत्र में डॉ. खुराना ने केस स्टडी आधारित शिक्षण की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन की घटनाओं और व्यावहारिक समस्याओं के माध्यम से विद्यार्थियों में विश्लेषण, तार्किक सोच और निर्णय क्षमता विकसित की जा सकती है।

आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील के. कबिया ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नवीन शिक्षण पद्धतियों और शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास जरूरी है।

डॉ. शंभू नाथ सिंह ने केस स्टडी को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

विद्यार्थी सत्र में जनरेटिव एआई और भविष्य के रोजगार पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों को डिजिटल दक्षता, निरंतर सीखने, कौशल विकास और एआई के जिम्मेदार उपयोग के महत्व से अवगत कराया गया। संचालन डॉ. ज्योति कुमारी मिश्रा ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया