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रंग लाएगी जलसहेलियों की पहल, नमामि गंगे परियोजना में शामिल होगी पहूज नदी

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रंग लाएगी जलसहेलियों की पहल, नमामि गंगे परियोजना में शामिल होगी पहूज नदी


महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल का जलसहेलियों को आश्वासन

झांसी, 20 मार्च (हि.स.)। बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहचान मानी जाने वाली तथा झांसी को पेयजलापूर्ति करने वाली पहूज (पुष्पावती) नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर एक बड़ी पहल सामने आई है। नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल (महानिदेशक) राजीव कुमार मित्तल ने जलसहेलियों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि पहुज नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से कार्यवाही करेंगे। यह जानकारी शुक्रवार काे जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाह ने दी।

दरअसल, जल सहेलियों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में नमामि गंगे के महानिदेशक से उनके कार्यालय में मिला। इस दौरान नदी की वर्तमान स्थिति, उसके सामने मौजूद चुनौतियों तथा अब तक किए गए सामुदायिक प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पहूज नदी, जिसे पुष्पावती के नाम से भी जाना जाता है, का उद्गम मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में है। यह नदी बैदौरा क्षेत्र से निकलकर झांसी जनपद में प्रवेश करती है और शहर के मध्य से होकर प्रवाहित होती है। झांसी शहर को इसी पहुज नदी से पेयजल आपूर्ति भी की जाती है, जिससे इसकी उपयोगिता और महत्व और अधिक बढ़ जाता है। बावजूद इसके, वर्तमान में नदी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और उस पर अतिक्रमण का प्रभाव भी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

कभी क्षेत्र की जीवनरेखा रही यह नदी आज गंभीर संकट से जूझ रही है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में कमी, बढ़ता प्रदूषण, अतिक्रमण, अवैज्ञानिक दोहन तथा जल स्रोतों के सूखने जैसी समस्याओं ने इसकी अविरलता और निर्मलता को प्रभावित किया है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर नदी का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है और जलधारा कमजोर पड़ती जा रही है, जिससे इसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है।

जल सहेलियों ने महानिदेशक को अवगत कराया कि वे लंबे समय से इस नदी के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं। उन्होंने समय-समय पर नदी यात्राएं, पदयात्राएं, श्रमदान कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान आयोजित किए हैं, जिनका उद्देश्य समाज को नदी के महत्व से जोड़ना और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाना रहा है। इन प्रयासों के बावजूद, बिना सरकारी सहयोग और ठोस योजनाओं के नदी का समग्र पुनर्जीवन संभव नहीं हो पा रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि पहुज नदी को नमामि गंगे जैसी राष्ट्रीय स्तर की महत्वाकांक्षी परियोजना में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत आने से नदी के लिए वैज्ञानिक ढंग से पुनर्जीवन कार्य, प्रदूषण नियंत्रण, तटों का संरक्षण, जलधारा का पुनर्संचालन और स्थायी जल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने जल सहेलियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जल सहेलियों द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और इस प्रकार की जनभागीदारी किसी भी नदी के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि पहुज नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करते हुए संबंधित स्तरों पर आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

इस अवसर पर जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाह, उपाध्यक्ष रेखा अहिरवार एवं लक्ष्मी कुशवाह, परमार्थ जल सहेली फाउंडेशन के सदस्य तथा राष्ट्रीय सलाहकार मनीष राजपूत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया