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सदन की बैठक में समय पर नहीं पहुंचे अधिकारी, भड़के पार्षदों ने किया बहिष्कार

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सदन की बैठक में समय पर नहीं पहुंचे अधिकारी, भड़के पार्षदों ने किया बहिष्कार


सदन की बैठक में समय पर नहीं पहुंचे अधिकारी, भड़के पार्षदों ने किया बहिष्कार


कहा - सदन की बैठक को मजाक बना कर रख दिया, तानाशाही नहीं चलेगी

नगर निगम परिसर में लगे पार्षद एकता जिंदाबाद के नारे

झांसी, 20 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में सोमवार को आयोजित नगर निगम सदन की बहुप्रतीक्षित बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब पार्षद समय पर सभागार पहुंचने के बावजूद अधिकारी निर्धारित समय तक उपस्थित नहीं हुए। बैठक में अरबों रुपये के विकास कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा और अनुमोदन होना था, लेकिन अधिकारियों की गैरमौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम को प्रभावित कर दिया।

पार्षदों का आरोप है कि बैठक सुबह करीब 11:45 बजे शुरू होनी थी, लेकिन अधिकारी अपने-अपने चैंबरों में बैठे रहे और सभागार में नहीं पहुंचे। इस लापरवाही से नाराज पार्षदों ने करीब सवा बारह बजे बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद सभी पार्षद नगर निगम के मुख्य गेट पर एकत्र हुए और जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने अधिकारियों पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब जनप्रतिनिधि समय का पालन कर सकते हैं, तो अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी, जिन पर अब अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।

हंगामे में राहुल कुशवाहा, कुसुम कुशवाह, सुशीला दुबे, अर्चना राय, रामजी यादव, विष्णु यादव, बंटी सोनी, नीता यादव, अमित राय, नरेंद्र नामदेव, रमा कुशवाहा, सुनीता पुरी, आशीष रायकवार, सुलेमान अहमद मंसूरी, रिंकू वंशकार सहित करीब 68 पार्षद मौजूद रहे और उन्होंने अधिकारियों के रवैये की कड़ी आलोचना की।

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ पार्षद ऐसे भी नजर आए, जो अधिकारियों के चैंबर में बैठकर अलग से चर्चा करते रहे। इसको लेकर भी अन्य पार्षदों में नाराजगी देखी गई और एकजुटता पर सवाल उठे।

घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी को उजागर कर दिया है, जिससे विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है।

अधिकारियों को एसी और जनता को पंखा तक नहीं

इस संबंध में पूर्व उपसभापति प्रियंका साहू ने कहा कि 03 साल से काम की एक बात नहीं होती है। सदन की बैठक की अपनी गरिमा है। उसी समय में अधिकारी अपनी तानाशाही बताते नजर आते हैं। अधिकारियाें को एसी से फुर्सत नहीं है और आम जनता के लिए पंखे तक नहीं है। ये अत्याचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 70 में से 68 पार्षदों ने विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि वार्ड 24 पार्षद विहीन है फिर भी उसमें साढ़े छह करोड़ के काम हो गए हैं और हम सभी पार्षदों को नाली बनवाने का भी बजट नहीं। जनता के सामने किस मुंह से हम वोट मांगने जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया