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साहित्य, समाज और संस्कृति के आदर्श पात्र हैं प्रभु श्रीराम : कुलपति

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साहित्य, समाज और संस्कृति के आदर्श पात्र हैं प्रभु श्रीराम : कुलपति


साहित्य, समाज और संस्कृति के आदर्श पात्र हैं प्रभु श्रीराम : कुलपति


बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, कोंच की रामलीला ने बांधा समां

झांसी, 23 फ़रवरी (हि.स.)। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सोमवार को “बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में देश-विदेश से आए विद्वानों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और बुंदेलखंड से उनके गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय रामायण केंद्र के निदेशक राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि बुंदेलखंड वह पुण्यभूमि है, जहां प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास का महत्वपूर्ण समय व्यतीत किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर उनके चरित्र से प्रेरणा लें। उन्होंने बताया कि जर्मनी सहित यूरोप के कई देशों में श्रीराम पर व्यापक शोध हुआ है। गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम और जानकी के चरित्र में मर्यादा, त्याग और करुणा की अद्वितीय छाप मिलती है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति मुकेश पाण्डेय ने कहा कि श्रीराम साहित्य, समाज और संस्कृति के आदर्श पात्र हैं। उनके बिना कोई साहित्य पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सुशासन, नीति, न्याय, त्याग और समता के सभी मानकों पर श्रीराम प्रेरणास्रोत हैं। बुंदेलखंड का उल्लेख किए बिना उनके चरित्र की चर्चा अधूरी है। डॉ. विद्या सागर उपाध्याय ने कहा कि यदि प्रत्येक युवा में श्रीराम के गुण समाहित हो जाएं तो विश्व का कल्याण संभव है। नार्वे से आए विद्वान डॉ. शरद आलोक ने कहा कि हमारे राम अहिंसा और मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे ने बुंदेलखंड के कण-कण में श्रीराम की उपस्थिति का उल्लेख किया।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अचला पाण्डेय ने किया, जबकि आभार डॉ. नवीन पटेल ने व्यक्त किया।

उद्घाटन सत्र में कोंच की रामलीला का मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा। संजय सिंघल ने रावण की भूमिका निभाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। संगोष्ठी में देशभर से आए साहित्यकार, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

जो धारण करने योग्य है, वही राम है

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में *बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम* विषय पर अनेक विद्वानों ने शोध पत्र एवं आलेखों का वाचन किया। प्रस्तुति में ग्वालियर की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना सेन ने राम के जीवन को सामाजिक समरसता का आदर्श बताते हुए कहा कि बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में राम का अद्भुत समन्वय है। जो धारण करने योग्य है, वह श्रीराम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया