हरी खाद का उपयोग करें और सहफसली खेती अपनाकर आय बढ़ाएं किसान : डॉ. वीके त्रिपाठी
कानपुर, 15 अप्रैल (हि.स.)। सभी इकाइयों को तकनीकी रूप से सुव्यवस्थित कर ऐसी तकनीक प्रदर्शित की जाए जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल सके। खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए हरी खाद का उपयोग करें और सहफसली खेती अपनाकर आय बढ़ाएं। वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों से संवाद स्थापित करें और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में चयनित कृषकों को शामिल करें। यह बातें बुधवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के निदेशक प्रसार डॉ. वीके त्रिपाठी ने कही।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के निदेशक प्रसार डॉ. वीके त्रिपाठी ने कृषि विज्ञान केन्द्र, थरियांव का भ्रमण कर विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मक्का के साथ मूंग की सहफसली खेती, प्रजातीय प्रदर्शन, पोषक बागवानी तथा सुगंधीय एवं औषधीय पौधों का अवलोकन किया और वैज्ञानिकों को आवश्यक निर्देश दिए।
इस दौरान तकनीकी पार्क में पौधारोपण किया गया तथा क्रॉप कैफेटेरिया को तकनीकी रूप से सुसज्जित करने के निर्देश दिए गए। बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत चना फसल का जायजा लेते हुए उसे शीघ्र भंडारण के निर्देश भी दिए।
भ्रमण के बाद उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में कृषक उप समिति की बैठक एवं संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों और कृषकों ने उनका स्वागत किया।
प्रभारी अधिकारी डॉ. साधना वैश ने कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. जगदीश किशोर ने फसल सुरक्षा, डॉ. जितेंद्र सिंह ने जायद फसलों की उत्पादन तकनीक तथा डॉ. एस.के. पांडेय ने आयपरक पशुपालन पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में डॉ. विनोद प्रकाश, डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह, डॉ. अल्का कटियार, कुंवरपाल गंगवार, पंकज कुमार (उद्यान निरीक्षक) सहित अन्य वैज्ञानिक एवं कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

