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भारतीय भाषाएं राष्ट्र की असली ताकत : डॉ. पी.सी. पतंजलि

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भारतीय भाषाएं राष्ट्र की असली ताकत : डॉ. पी.सी. पतंजलि


भारतीय भाषाएं राष्ट्र की असली ताकत : डॉ. पी.सी. पतंजलि


जौनपुर, 30 मार्च (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज में सोमवार को “भारतीय संस्कृति एवं भाषाओं का विकास” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं की समृद्ध परम्परा और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. पी.सी. पतंजलि ने भारतीय संस्कृति और भाषाओं के गहरे सम्बंध को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने बताया कि संस्कृत, हिंदी, उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं ने भारतीय ज्ञान परम्परा को समृद्ध किया है। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया और युवाओं से अपनी भाषाई विरासत को सहेजने का आह्वान किया।

समाजसेवी डॉ. विमला सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कृति के अनुरूप ढालना समय की आवश्यकता है, जिससे वे अपने मूल्यों और परम्पराओं से जुड़े रह सकें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर खान ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों की वाहक है। उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता को देश की सांस्कृतिक एकता का आधार बताया।

कार्यक्रम का संचालन अहमद अब्बास खान ने किया। संगोष्ठी में डॉ. जीवन यादव, आर.पी. सिंह, डॉ. शाहिदा परवीन, डॉ. प्रेमलता गिरी, डॉ. अनिरुद्ध सिंह, डॉ. तरन्नुम फातिमा, डॉ. प्रज्वलित यादव, डॉ. आशीष श्रीवास्तव और प्रवीण यादव सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव