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आईआईटी कानपुर का “रेनॉयर” टूल कैंसर और अंगों के विकास में कोशिकाओं के छिपे संकेतों को समझेगा : प्रो. हमीम ज़फ़र

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आईआईटी कानपुर का “रेनॉयर” टूल कैंसर और अंगों के विकास में कोशिकाओं के छिपे संकेतों को समझेगा : प्रो. हमीम ज़फ़र


कानपुर, 07 मई (हि.स.)। रेनॉयर के माध्यम से अब यह समझना संभव हो गया है कि किसी विशेष सिग्नलिंग इंटरैक्शन का कोशिकाओं में जीन गतिविधि पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह कैंसर जैसी जटिल बीमारियों में रोग-प्रेरित संचार नेटवर्क की पहचान करने और अधिक सटीक उपचार लक्ष्य खोजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह बातें गुरुवार को आईआईटी कानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. हमीम ज़फ़र ने कही। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के शोधकर्ताओं ने “रेनॉयर” नामक एक उन्नत कम्प्यूटेशनल टूल विकसित किया है, जो वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि जटिल ऊतकों के भीतर कोशिकाएं आपस में किस प्रकार संवाद करती हैं। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित हुआ है।

यह टूल स्थानिक जीन-अभिव्यक्ति डेटा का उपयोग कर यह पहचानता है कि कौन-सी कोशिकाएं आपस में संवाद कर रही हैं और उनके संकेत जीन गतिविधियों को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं। इससे शोधकर्ताओं को कैंसर, अंगों के विकास और अन्य जटिल बीमारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी। अध्ययन के प्रथम लेखक और आईआईटी कानपुर के पूर्व एमएस छात्र नरेन राव ने बताया कि इस टूल का नाम फ्रांसीसी कलाकार रेनॉयर के नाम पर रखा गया है, क्योंकि यह ऊतकों में सक्रिय जीन गतिविधियों को मानो चित्रित करता है।

यह अध्ययन ऑस्ट्रेलिया स्थित गर्वन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से किया गया। शोध में भ्रूणीय यकृत और लिवर कैंसर से जुड़े डेटा का उपयोग कर ट्यूमर की प्रगति और विकास प्रक्रियाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार “रेनॉयर” कैंसर जीवविज्ञान, विकासात्मक अनुसंधान और सटीक चिकित्सा के क्षेत्र में नई खोजों को गति देने में सहायक साबित हो सकता है। यह सॉफ्टवेयर रिसर्च कम्यूनिटी के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप