आईआईटी कानपुर ने पल्सर की दूरी मापने का नया तरीका विकसित किया
कानपुर, 25 फरवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (एनसीआरए) पुणे के वैज्ञानिकों ने पल्सर जैसे आवधिक रेडियो तरंगें उत्सर्जित करने वाले तारों की दूरी मापने का एक नया और अधिक सटीक तरीका विकसित किया है। यह शोध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित जर्नल मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी (एमएनआरएएस) में प्रकाशित हुआ है, यह जानकारी आईआईटी कानपुर के प्रो. पंकज जैन ने दी।
उन्होंने बताया कि खगोल विज्ञान में तारों की सही दूरी मापना एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है। पारम्परिक त्रिकोणमितीय पैरालैक्स विधि केवल नजदीकी तारों तक सीमित है, जबकि अन्य विधियों में त्रुटि की सम्भावना अधिक रहती है। नई विकसित तकनीक पल्सर से प्राप्त रेडियो संकेतों पर अंतरतारकीय माध्यम के दो प्रमुख प्रभावों—विक्षेपण माप और प्रकीर्णन-जनित विस्तार—के संयुक्त विश्लेषण पर आधारित है।
अंतरिक्ष पूर्णतः रिक्त नहीं है, बल्कि इसमें कम घनत्व वाले कण और मुक्त इलेक्ट्रॉनों का व्यापक वितरण होता है। यही अंतरतारकीय माध्यम रेडियो तरंगों के प्रसार को प्रभावित करता है। मुक्त इलेक्ट्रॉन अलग-अलग तरंगदैर्ध्य की तरंगों को अलग-अलग मात्रा में विलम्बित करते हैं, जिसे विक्षेपण कहा जाता है, जबकि प्रकीर्णन के कारण संकेत का फैलाव बढ़ जाता है। दूरी बढ़ने के साथ दोनों प्रभाव बढ़ते हैं, हालांकि उनकी निर्भरता अलग-अलग प्रकार से होती है।
इन दोनों प्रभावों के संयुक्त अध्ययन से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि रेडियो संकेत ने अंतरतारकीय माध्यम में कितनी दूरी तय की है। इस नई विधि से एनई2001 और वाईएमडब्ल्यू16 जैसे मौजूदा गलैक्टिक इलेक्ट्रॉन घनत्व मॉडलों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है, जिससे दूरी आंकलन अधिक विश्वसनीय बनता है।
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को गम नीहारिका की दिशा में स्थित पल्सरों पर लागू कर इसकी उपयोगिता प्रदर्शित की है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस पद्धति के व्यापक उपयोग से आकाशगंगा के इलेक्ट्रॉन घनत्व मॉडल अधिक सटीक बनाए जा सकेंगे। इससे पल्सरों की वास्तविक स्थिति, गति और रेडियो चमक का बेहतर आंकलन संभव होगा। इसके अलावा, यह तकनीक फास्ट रेडियो बर्स्ट जैसी बाह्य-आकाशगंगीय घटनाओं की दूरी और उनके परिवेश को समझने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

