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सीखने के साथ कमाई का हुनर सीख रहे उद्यानिकी के छात्र

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सीखने के साथ कमाई का हुनर सीख रहे उद्यानिकी के छात्र


बांदा, 22 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के बीएससी (उद्यानिकी) छात्र-छात्राएं एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम (ईएलपी) के तहत नर्सरी प्रबंधन और स्वरोजगार के गुर सीख रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है।

उद्यान महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग की ओर से संचालित ‘नर्सरी प्रोडक्शन एंड वैल्यू एडिशन ऑफ फ्लावर्स’ पाठ्यक्रम में छात्रों को पौधों की नर्सरी तैयार करने, उनकी देखभाल, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार में बिक्री तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम ‘अर्न व्हाइल यू लर्न’ की अवधारणा पर आधारित है।

ईएलपी प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया की देखरेख में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न सजावटी, पुष्पीय और व्यावसायिक पौधों की नर्सरी तैयार की। गर्मी के मौसम में लगाए जाने वाले गेंदा, कॉसमॉस, सेलोशिया, जिनिया, सनफ्लावर और कोचिया की पौध तैयार की गई। इसके साथ ही बोगेनवेलिया, फाइकस, तुलसी, कनेर और गुड़हल जैसे बहुवर्षीय पौधों की कटिंग भी तैयार की गई। छात्रों ने इन पौधों की विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ बांदा शहर में जाकर मार्केटिंग भी की।

फूलों से तैयार किए मूल्य संवर्धित उत्पाद

कार्यक्रम के तहत छात्रों ने फूलों और पौधों से विभिन्न उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए। इनमें हर्बल गुलाल, हर्बल टी, सूखे फूलों से ईयररिंग्स, चाबी के छल्ले, फ्लोरल फ्रेम और धूपबत्ती आदि शामिल हैं। छात्रों ने इन उत्पादों की पैकेजिंग, सजावट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी स्वयं संभाली। उत्पादों की बिक्री के माध्यम से उन्हें व्यावसायिक अनुभव के साथ आय अर्जित करने का अवसर भी मिला।

उद्यान महाविद्यालय के डीन डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। फ्लोरीकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में तैयार करना है। नर्सरी प्रबंधन और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में स्वरोजगार की काफी संभावनाएं हैं।

ईएलपी प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया ने बताया कि नर्सरी उत्पादन और अलंकृत पौधों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से युवा अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।

मार्केटिंग से मिला व्यावसायिक अनुभव

छात्र-छात्राओं का कहना है कि इस प्रैक्टिकल कोर्स से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। नर्सरी तैयार करने से लेकर उत्पाद बनाने और उन्हें बाजार में बेचने तक का अनुभव उन्हें मिला है। छात्रों के मुताबिक उत्पाद तैयार करने के साथ उसकी मार्केटिंग भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इस कार्यक्रम ने उन्हें टीम के रूप में काम करने, ग्राहकों से संवाद करने और अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने का व्यावहारिक अनुभव दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह