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एआरटी केन्द्रों पर 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित निःशुल्क प्राप्त कर रहे दवा

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एआरटी केन्द्रों पर 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित निःशुल्क प्राप्त कर रहे दवा


लखनऊ, 23 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी द्वारा साेमवार को राज्य सूचना विभाग के सभागार, लखनऊ में एचआईवी-एड्स विषय पर राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य एचआईवी-एड्स से सम्बंधित सही जानकारी का प्रसार, सामाजिक कलंक को कम करना तथा जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में मीडिया की सकारात्मक भूमिका को सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक रमेश श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक डॉ. संजय सोलंकी सहित सूचना विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया। संयुक्त निदेशक रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि एचआईवी-एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तथ्यात्मक एवं संवेदनशील रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है तथा लोगों को जाँच और उपचार सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

कार्यशाला में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार भारत में लगभग 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ तथा लगभग 2.75 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं। देश में अधिकांश संक्रमण असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से होता है, जबकि कुछ राज्यों में संक्रमित सूई एवं सिरिंज के उपयोग से भी संक्रमण के मामले सामने आते हैं। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित व्यक्ति एआरटी केन्द्रों पर निःशुल्क परामर्श, उपचार एवं दवा प्राप्त कर रहे हैं।

संयुक्त निदेशक डॉ. संजय सोलंकी ने बताया कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला का समय पर उपचार करने से बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है, इसलिए सभी गर्भवती महिलाओं की प्रारम्भिक जाँच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 72 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक लगभग 62 लाख गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा चुकी है।

विशेषज्ञों ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) विश्व के सबसे बड़े एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रमों में से एक है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मृत्यु में 80 प्रतिशत तक कमी लाना तथा सभी जोखिमग्रस्त वर्गों को गुणवत्तापूर्ण जाँच एवं उपचार सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन