home page

सीतापुर के ऐतिहासिक लालबाग की शहादत 'शहीद अष्टक' में हुई जीवंत

 | 
सीतापुर के ऐतिहासिक लालबाग की शहादत 'शहीद अष्टक' में हुई जीवंत


सीतापुर के ऐतिहासिक लालबाग की शहादत 'शहीद अष्टक' में हुई जीवंत


सीतापुर, 26 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के सीतापुर शहर के ऐतिहासिक लालबाग पार्क (पूर्व मोतीबाग) में वर्ष 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान शहीद हुए छह वीर बलिदानियों की गौरवगाथा अब साहित्य के माध्यम से नई पहचान पा रही है। वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण पांडेय ‘संजय’ द्वारा रचित काव्यकृति ‘शहीद अष्टक’ इन अमर सेनानियों को समर्पित एक भावपूर्ण प्रस्तुति है।

18 अगस्त 1942 को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा निहत्थे देशभक्तों पर की गई गोलीबारी में लाल कुल्लूराम, मैकूलाल, चंद्रभाल मिश्र, मुन्नेलाल, बाबूशाह और मोहर्रम अली ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। इस ऐतिहासिक घटना को “मिनी जलियांवाला बाग” के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन लंबे समय तक यह सिर्फ स्मारकों और शिलापटों तक सीमित रही। ‘शहीद अष्टक’ के माध्यम से पहली बार इन बलिदानियों की शौर्यगाथा को साहित्यिक रूप में सहेजा गया है। कृति में घनाक्षरी छंदों के जरिए शहीदों के साहस और देशभक्ति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही सीतापुर के गौरव कैप्टन मनोज पांडेय को भी काव्यांजलि दी गई है।

शहीद अष्टक: इतिहास को शब्दों में संजोने का प्रयास

‘शहीद अष्टक’ केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि सीतापुर के गौरवशाली इतिहास को जीवंत करने का सशक्त माध्यम है। वर्ष 1942 में लालबाग में हुए शहीद कांड को अब तक साहित्य में स्थान नहीं मिल पाया था, जिससे यह घटना नई पीढ़ी की स्मृतियों से धीरे-धीरे ओझल होती जा रही थी। इस कृति के माध्यम से लेखक ने उस ऐतिहासिक क्षण को शब्दों में पिरोकर एक स्थायी पहचान देने का प्रयास किया है। घनाक्षरी छंदों में लिखी गई यह रचना न सिर्फ साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देशभक्ति की भावना को भी सशक्त करती है। इसमें शहीदों के त्याग, साहस और संघर्ष को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि पाठक भावुक हुए बिना नहीं रह सकता।

युवाओं को इतिहास से जोड़ने की पहल

इस काव्यकृति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने क्षेत्र के इतिहास और बलिदान से परिचित कराना भी है। लेखक रामकृष्ण पांडेय ‘संजय’ ने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि जब तक युवाओं को अपने आसपास की ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी नहीं होगी, तब तक उनमें सच्ची राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित नहीं हो सकती। इसी सोच के तहत ‘शहीद अष्टक’ को ग्राम पंचायतों की डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इससे ग्रामीण अंचलों के युवाओं को भी आसानी से इस कृति का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। यह पहल न सिर्फ शहीदों के सम्मान को बढ़ाएगी, बल्कि समाज में देशभक्ति और प्रेरणा का एक नया वातावरण भी तैयार करेगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में लखनऊ में शहीद अष्टक का विमोचन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Mahesh Sharma