कानपुर में आधी आबादी को मिला सुरक्षा का 'कवच
- छह महीने में 1900 से अधिक महिलाओं की मददगार बनी योगी सरकार- मिशन शक्ति अभियान के तहत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर ने बिखरे परिवारों को जोड़ा और पीड़ितों को दिया तत्काल सहारा- जनवरी से जून 2026 के बीच आए कुल 1924 मामले, मनोसामाजिक परामर्श और आपसी समझौते से सुलझाए गए सबसे ज्यादा विवाद
कानपुर, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के 'मिशन शक्ति' अभियान का असर धरातल पर साफ दिख रहा है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें तत्काल सहायता पहुंचाने के संकल्प को कानपुर का 'सखी वन स्टॉप सेंटर' बखूबी पूरा कर रहा है। इस साल जनवरी से जून 2026 के बीच, यानी महज छह महीनों में ही, जिले की 1924 पीड़ित महिलाओं को इस सेंटर के जरिए नया जीवन और मजबूत सहारा मिला है। सरकार की इस पहल से न सिर्फ महिलाओं का आत्मबल बढ़ा है, बल्कि टूटने की कगार पर पहुंच चुके सैकड़ों परिवार भी फिर से एक हो गए हैं।
सखी वन स्टॉप सेंटर के मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो हर महीने पीड़ितों को न्याय और राहत देने के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम किया गया है। सुलह-समझौते के मामलों में जनवरी में 41, फरवरी में 40, मार्च में 29, अप्रैल में 142, मई में 122 और जून में 48 मामलों का निस्तारण किया गया। इसी तरह, सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी मनोसामाजिक परामर्श के तहत जनवरी में 117, फरवरी में 135, मार्च में 141, अप्रैल में 142, मई में 235 और जून में 163 महिलाओं की काउंसलिंग कर उन्हें मानसिक तनाव से उबारा गया।
संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षित आश्रय देने के लिए शेल्टर होम की सुविधा भी दी गई, जिसमें जनवरी में 37, फरवरी में 19, मार्च में 33, अप्रैल में 35, मई में 46 और जून में 41 मामले आए। स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल के लिए मेडिकल सहायता के तहत जनवरी में 37, फरवरी में 19, मार्च में 33, अप्रैल में 35, मई में 42 मामले दर्ज किए गए, जबकि जून में कोई मामला नहीं आया। कानूनी फेर में फंसी महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता भी दी गई, जिसमें जनवरी में पांच, फरवरी में चार, मार्च में पांच, अप्रैल में आठ, मई में नौ और जून में सात मामले शामिल रहे। वहीं, त्वरित सुरक्षा के लिए पुलिस सहायता के तहत जनवरी में 22, फरवरी में आठ, मार्च में 33, अप्रैल में 26, मई में 38 और जून में 27 मामलों में तुरंत मदद पहुंचाई गई।
छह महीने की इस अवधि में सबसे अधिक काम महिलाओं को मानसिक तनाव से बाहर निकालने और पारिवारिक विवादों को आपसी रजामंदी से निपटाने में हुआ है। सबसे ज्यादा 933 महिलाओं को मनोसामाजिक परामर्श दिया गया, जिससे वे अपने अवसाद से बाहर निकल सकीं। इसके अलावा, 422 मामलों में दोनों पक्षों को बिठाकर बेहद सूझबूझ के साथ सुलह-समझौता कराया गया, जिससे कई घर उजड़ने से बच गए।
वहीं, बेघर और प्रताड़ित महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए 211 मामलों में शेल्टर की सुविधा दी गई। गंभीर परिस्थितियों में फंसी महिलाओं के इलाज के लिए 166 मामलों में मेडिकल केस दर्ज कर उपचार कराया गया, जबकि 154 मामलों में तुरंत पुलिस सहायता और 38 मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं को उनके हक दिलाए गए।
सखी वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर वंदना द्विवेदी ने बताया कि सखी वन स्टॉप सेंटर का एकमात्र उद्देश्य पीड़ित महिला को एक ही छत के नीचे बिना किसी भटकाव के सभी जरूरी सुविधाएं देना है। हमारे पास आने वाली हर पीड़ित बहन-बेटी को हम सबसे पहले मानसिक रूप से मजबूत करते हैं। छह महीने में 900 से अधिक महिलाओं की काउंसलिंग और 400 से ज्यादा परिवारों में सुलह कराना हमारी टीम की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास कुमार ने शुक्रवार को कहा कि महिला सुरक्षा और सम्मान योगी सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से हम हर पीड़ित महिला तक त्वरित प्रशासनिक, कानूनी और चिकित्सीय मदद पहुंचा रहे हैं। आंकड़ों से साफ है कि पुलिस सहायता, चिकित्सा और विधिक सहायता के मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई है। हमारा विभाग लगातार इस बात की निगरानी करता है कि सेंटर पर आने वाली किसी भी महिला को परेशानी न हो और उसे समय पर मदद मिले।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

