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आईआईटी : हैक आईआईटीके 2026 ग्रैंड फिनाले में आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पुणे की टीम ने जीता प्रथम पुरस्कार

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आईआईटी : हैक आईआईटीके 2026 ग्रैंड फिनाले में आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पुणे की टीम ने जीता प्रथम पुरस्कार


कानपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। आईआईटी कानपुर में आयोजित वैश्विक साइबर सुरक्षा हैकाथॉन हैक आईआईटीके 2026 का ग्रैंड फिनाले संपन्न हो गया, जिसमें देशभर की टीमों ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। “इस हैकाथॉन में युवाओं ने महत्वपूर्ण अवसंरचना सुरक्षा के लिए नवाचारी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं, जो भविष्य की साइबर चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बातें शुक्रवार काे आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कही।

कानपुर स्थित सी3आईहब, जो आईआईटी कानपुर का साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र है, ने दो दिवसीय हैक आईआईटीके 2026 के विजेताओं की घोषणा कर दी। इस वर्ष प्रतियोगिता का मुख्य विषय “महत्वपूर्ण अवसंरचना सुरक्षा” रहा, जिसका उद्देश्य डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों का समाधान खोजना था।

कार्यक्रम में दो प्रमुख श्रेणियों — समाधान ट्रैक और कैप्चर द फ्लैग ट्रैक — में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। देशभर से नौ हजार से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 48 टीमें ग्रैंड फिनाले तक पहुंच सकीं। प्रतिभागियों ने अपनी तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

समाधान ट्रैक में आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे की टीम शैडो बाइट ने पहला स्थान प्राप्त कर तीन लाख रुपये का पुरस्कार जीता। टीम नाइट म्याउल्स दूसरे स्थान पर रही, जिसे दो लाख रुपये मिले। वहीं फादर कोंसिसाओ रोड्रिग्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नवी मुंबई की टीम ब्लाइंड कोडर्स को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ और 1 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया।

कैप्चर द फ्लैग ट्रैक में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर की टीम क्यूट कैट ने पहला स्थान हासिल किया। इसी विश्वविद्यालय की टीम दिग्गज दूसरे स्थान पर रही, जबकि दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की टीम ईहैक्स तीसरे स्थान पर रही।

विशेष पुरस्कारों में टीम वीएनआईटीएक्स को सर्वश्रेष्ठ नवाचार समाधान के लिए 50 हजार रुपये और टीम वैलियम रिसर्च को सर्वश्रेष्ठ सीटीएफ दृष्टिकोण के लिए 50 हजार रुपये प्रदान किए गए।

इस हैकाथॉन में प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक विचारों तक सीमित न रहकर वास्तविक तकनीकी समाधान विकसित करने की चुनौती दी गई थी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा, क्वांटम युग की क्रिप्टोग्राफी और डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा जैसे विषयों पर काम किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप