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12 साल बाद भी कब्जामुक्त नहीं हुई सरकारी जमीन, न्याय की आस में भटक रहा पीड़ित

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12 साल बाद भी कब्जामुक्त नहीं हुई सरकारी जमीन, न्याय की आस में भटक रहा पीड़ित


तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश भी दरकिनार, पुलिस लगा रही एफआर पर एफआर

झांसी, 17 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी शहर में सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जों और विवादित भूमि के क्रय-विक्रय के मामलों ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालतों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वर्षों पहले सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के आदेश दिए जाने के बावजूद कई मामलों में आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे पीड़ित पक्षों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।

सदर बाजार थाना क्षेत्र के ग्राम सिमरा निवासी एवं वर्तमान में इलाहाबाद बैंक चौराहा क्षेत्र में रहने वाले बृजेंद्र राय ने पत्रकारों से बातचीत में बुधवार काे बताया कि उन्होंने वर्ष 2014 में हरिकिशन राय से होमगार्ड ट्रेनिंग सेंटर परिसर के निकट दो प्लॉट खरीदे थे। भूमि खरीदते समय उन्हें बताया गया था कि जमीन विवाद मुक्त है और वैध रूप से खरीदी गई है। लेकिन रजिस्ट्री के बाद जब वह कब्जा लेने पहुंचे तो कुछ लोगों ने जमीन पर अपना दावा करते हुए उन्हें रोक दिया।

बृजेंद्र राय का आरोप है कि कब्जा दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये की मांग की गई। बाद में जानकारी करने पर पता चला कि संबंधित भूमि राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की सरकारी जमीन है, जिसके क्रय-विक्रय पर तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा रोक भी लगाई जा चुकी थी। इसके बावजूद भूमि से जुड़े बैनामे, एग्रीमेंट और नामांतरण किए जाते रहे।

मामले में वर्ष 2023 में कोतवाली पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पीड़ित का आरोप है कि प्रारंभिक विवेचना में बिना पर्याप्त साक्ष्यों के अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी गई। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पुनर्विवेचना के आदेश हुए और जांच में कई कमियां भी सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद मामला अब तक अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका है।

बृजेंद्र राय का कहना है कि वह वर्षों से एसडीएम, पुलिस अधिकारियों और न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिल पाया। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया