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गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब

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गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब


गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब


गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब


गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब


गोरखपुर में नवसंवत्सर पर अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत प्रदर्शन, भव्य पथ संचलन में उमड़ा जनसैलाब




गोरखपुर, 18 मार्च (हि.स.)। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नवसंवत्सर) के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोरखपुर महानगर दक्षिण द्वारा बुधवार को भव्य और अनुशासित पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में स्वयंसेवक पारंपरिक गणवेश में सुसज्जित होकर बैंड की मधुर धुन के साथ कदमताल करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। स्वयंसेवकों का अनुशासन, एकरूपता और ऊर्जा देखते ही बन रही थी। जहां-जहां से संचलन गुजरा, वहां नागरिकों ने रुककर इस दृश्य को सराहा।

कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज परिसर में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण से हुई। यहां बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किया गया तथा आद्य सरसंघचालक को सामूहिक प्रणाम किया गया। इसके पश्चात मुख्य वक्ता के रूप में गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विक्रम संवत 2083 का प्रारंभ भारतीय कालगणना के अनुसार अत्यंत तार्किक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक एवं व्यवहारिक आधार पर होता है। उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है—इसी दिन भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना, सतयुग का आरंभ, भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक तथा स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना मानी जाती है। साथ ही संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को ऐसे समय में हुई जब देश में देशभक्ति तो थी, लेकिन वह अधिकतर प्रतिक्रियात्मक स्वरूप में दिखाई देती थी। डॉ. हेडगेवार ने स्वाभाविक देशभक्ति और समाजभक्ति को विकसित करने का संकल्प लिया। उन्होंने ऐसे व्यक्तित्व निर्माण की आवश्यकता बताई जो देश के लिए केवल मरने ही नहीं, बल्कि जीने के लिए भी समर्पित हों। इसी उद्देश्य से संघ ने संगठित, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया, जो आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में पूरे देश में फैल चुका है।

रमेश ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विश्व के अनेक देश संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, तब भारत शांति, सद्भाव और मार्गदर्शन की आशा के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता है और संघ इसी दिशा में समाज को जोड़ने, सेवा की भावना विकसित करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है।

मुख्य उद्बोधन से पूर्व कार्यक्रम में अमृत वचन और एकल गीत की प्रस्तुति भी हुई, जिसने वातावरण को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया।

पथ संचलन महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, गोलघर से प्रारंभ होकर हरिओम नगर तिराहा, आंबेडकर चौक, शास्त्री चौक, कचहरी चौक, टाउनहॉल, बैंक रोड, विजय चौक, गणेश चौक और जिला परिषद होते हुए पुनः कॉलेज परिसर में समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं व्यापारियों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इस अवसर पर प्रांत प्रचारक प्रमुख डॉ. अवधेश, सह विभाग संघचालक आत्मा सिंह, विभाग प्रचारक अजय नारायण, जिला प्रचारक मनीष, नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन के प्रांत सचिव डॉ. अमित सिंह श्रीनेत, रोहित, रामनाथ, प्रवीण, डॉ. अभिषेक, पुनीत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभाव और नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय