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राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या

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राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


राजस्थान दिवस पर गोरखपुर में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग संध्या


गोरखपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)।

राजस्थान संस्कृति मंच द्वारा राजस्थान दिवस के अवसर पर रविवार को रंगरेजा रेस्टोरेंट, गोरखपुर में एक गरिमामय सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत की प्रभावशाली झलक देखने को मिली।

आयोजन में राजस्थानी समाज के लोगों के साथ शहर के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एएसपी दिनेश गोदारा (आईपीएस) उपस्थित रहे। उनके साथ डॉ. गौरव सिंह सोग्रवाल (आईएएस), नगर आयुक्त तथा अनुज मलिक (आईएएस), सीईओ गीडा की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। वहीं वरिष्ठ शिक्षाविद आशुतोष मिश्र विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की लोक-परंपरा, सामाजिक आत्मीयता और सांस्कृतिक अस्मिता को विविध आयामों में प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सामाजिक संवाद और आत्मीय मिलन ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।

मुख्य अतिथि एएसपी दिनेश गोदारा (आईपीएस) ने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा केवल एक प्रदेश की पहचान नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, सामाजिक अनुशासन और लोक गौरव की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी विरासत, संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करते हैं। उनके अनुसार सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होती है।

डॉ. गौरव सिंह सोग्रवाल (आईएएस), नगर आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान की लोक-संस्कृति में परंपरा, अनुशासन, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का अनुपम संतुलन दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को केवल उत्सव का अवसर नहीं देते, बल्कि लोगों को अपनी जड़ों, अपने मूल्यों और अपनी सामाजिक पहचान से पुनः जोड़ने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अनुज मलिक (आईएएस), सीईओ गीडा ने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर भारतीय परंपरा की अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायी धारा है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति, लोक-परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को सहेजता है, तभी वह आने वाली पीढ़ी को मजबूत पहचान और नैतिक आधार दे पाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सामाजिक बंधन को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी में अपनी विरासत के प्रति सम्मान का भाव जगाते हैं।

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद आशुतोष मिश्र ने कहा कि राजस्थान की लोक-संस्कृति में शौर्य, स्वाभिमान, परंपरा, आत्मीयता और मानवीय मूल्यों का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है, तभी वह अपनी पहचान को सशक्त रूप से आगे बढ़ा पाता है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लोक-स्मृतियों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना आज समय की बड़ी आवश्यकता है, और इस दृष्टि से ऐसे आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्थान की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, लोक-परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। इस अवसर पर राजस्थान की लोक-जीवन परंपरा, उसकी सामुदायिक चेतना, सामाजिक समरसता और उत्सवधर्मिता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। समारोह में उपस्थित लोगों ने मरुधरा की सांस्कृतिक पहचान, लोक-रंग और आत्मीयता को निकट से अनुभव किया।

कार्यक्रम में विनोद, सुरेन्द्र, चम्पालाल सहित अनेक गणमान्यजन भी उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति से समारोह की आत्मीयता और गरिमा और बढ़ी।

कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में प्रकाश सिंह चौधरी की सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने, अतिथियों के स्वागत-सम्मान तथा समाज के लोगों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों से समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय