मां गोमती के उद्गम स्थल फुलहर झील के संरक्षण की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
लखनऊ, 28 मई (हि.स.)। “गोमती दर्शन” संस्था की ओर से मां गोमती के उद्गम स्थल फुलहर झील की लगातार बिगड़ती स्थिति एवं जलस्तर में हो रही गिरावट को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजा गया है।
संस्था के संयोजक अनुराग पांडे एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में जनपद पीलीभीत स्थित माधोटांडा क्षेत्र की फुलहर झील में हो रहे अत्यधिक भूजल दोहन, जलस्रोतों पर अतिक्रमण तथा प्राकृतिक संरचनाओं के विनाश पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मां गोमती, जिन्हें “आदि गंगा” के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। फुलहर झील वही पवित्र स्थल है जहां से निकलकर मां गोमती सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश को जीवन प्रदान करती हैं।
संस्था की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, वर्ष 1989 से 2018 के बीच फुलहर झील के जलस्तर में लगभग 60 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही क्षेत्र में अत्यधिक भूजल दोहन एवं प्राकृतिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण के कारण झील का अस्तित्व संकट में दिखाई दे रहा है।
प्रार्थना पत्र में सरकार से मांग की गई है कि जलस्रोतों एवं तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, किसानों के लिए वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, अत्यधिक भूजल दोहन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। फुलहर झील की वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों से सफाई कराई जाए तथा झील के बंद पड़े प्राकृतिक स्रोतों को पुनर्जीवित किया जाए।
“गोमती दर्शन” संस्था ने विश्वास व्यक्त किया है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए तो मां गोमती पुनः अपने उद्गम स्थल से अविरल एवं निर्मल स्वरूप में प्रवाहित हो सकेंगी। संस्था ने मुख्यमंत्री से विशेष कार्ययोजना बनाकर फुलहर झील एवं मां गोमती के उद्गम क्षेत्र के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रह सके।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

