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हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने वाले पर बनी रहती है भगवान की कृपा : रजनीकांत द्विवेदी

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हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने वाले पर बनी रहती है भगवान की कृपा : रजनीकांत द्विवेदी


हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने वाले पर बनी रहती है भगवान की कृपा : रजनीकांत द्विवेदी


जौनपुर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में नगर स्थित एक लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को

कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कौरव-पांडव युद्ध और अश्वत्थामा सहित विभिन्न प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति हर परिस्थिति में दयालुता और संतोष का भाव बनाए रखता है, उस पर भगवान नारायण की कृपा बनी रहती है। आज के समय में लोग मान-सम्मान और प्रतिष्ठा के पीछे परेशान हैं, जबकि परमात्मा की कथा के श्रवण के लिए सत्संग और सद्विचार आवश्यक हैं।

कथाव्यास ने कौरव-पांडव युद्ध के बाद की घटनाओं का वर्णन करते हुए बताया कि सभी कौरवों के मारे जाने और दुर्योधन के जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष करने से आहत अश्वत्थामा ने पांडवों को मारने का संकल्प लिया। इसमें असफल होने पर उसने पांडवों के पांच पुत्रों की हत्या कर उनके सिर दुर्योधन के सामने रख दिए। यह देखकर दुर्योधन भी विचलित हो उठा। उसे लगा कि अश्वत्थामा ने कौरव वंश के चिराग बुझा दिए। अंततः दुर्योधन ने तड़पते हुए प्राण त्याग दिए।

उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से अश्वत्थामा को दिए जाने वाले दंड के बारे में पूछा, तो उन्होंने उसे जीवित छोड़ने की बात कही। इसके बाद श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के माथे से उसकी मणि निकाल ली। युधिष्ठिर ने भी उसे गुरु का पुत्र बताते हुए उसका वध करने से इनकार कर दिया। कथाव्यास ने कहा कि पुराणों में बालक की हत्या को गंभीर अपराध माना गया है।

कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं। कथा प्रारंभ होने से पूर्व विवेक सेठ और विनीत सेठ ने व्यासपीठ की आरती उतारकर कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टंडन, सोमेश्वर केसरवानी, अमित त्रिपाठी, रामदयाल द्विवेदी, लोलारक दुबे, नन्हे लाल वर्मा, विभाग प्रचारक आदित्य, रजनीश, महेंद्र, सत्येंद्र, सुरेश तिवारी, विवेक पाठक, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ सहित गठना कोठी परिवार के सदस्य, शीतला धाम के महंत विनय त्रिपाठी और अन्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव