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24 साल बाद फिर हेतमापुर में सरयू का कहर, कटान की भेंट चढ़े मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज

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बाराबंकी 14 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्लॉक के हेतमपुर गांव में दिनों दिन सरयू नदी की कथा बढ़ती जा रही है लाख इंतजाम के बावजूद नदी रोके नहीं रुक रही है। बीते रविवार की रात से लेकर सोमवार की सुबह तक नदी की कटान जारी थी। सरयू नदी ने करीब 24 साल बाद सूरतगंज ब्लॉक के हेतमापुर गांव में एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। तेज धारा के साथ हो रहे कटान में नया हनुमान मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज का भवन नदी की धारा में समा गया। कटान का दायरा लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। खास बात यह है कि नदी इस बार भी करीब उसी स्थान तक पहुंची है, जहां दो दशक से अधिक समय पहले कटान का कहर बरपा था।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2002 के आसपास हेतमापुर में सरयू नदी ने इसी तरह भीषण कटान किया था। उस समय यहां स्थित पुराना हनुमान मंदिर भी नदी की धारा में कट गया था। कटान रोकने के लिए लगातार बचाव कार्य कराए गए और बड़ी मात्रा में बोल्डर डाले गए, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद नदी पीछे हटने का नाम नहीं ले रही थी। स्थिति बिगड़ने पर टेलीफोन एक्सचेंज की मशीनरी तक सुरक्षित स्थान पर हटानी पड़ी थी।

बाद में टेलीफोन भवन के आसपास नदी का रुख थमा और कटान कुछ कम हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक उस समय तैनात जेई वीपी सिंह के प्रयास से वहां नया हनुमान मंदिर बनवाया गया था। करीब 24 वर्ष बाद इस बार वही मंदिर भी सरयू की कटान की चपेट में आ गया। इसके साथ ही टेलीफोन एक्सचेंज का भवन भी नदी की तेज धारा में ढह गया।

बाबा नारायण दास मंदिर के करीब पहुंची नदी

वर्तमान में प्रशासन और बाढ़ कार्य खंड की ओर से कटान रोकने के लिए बोल्डर डालकर बचाव कार्य कराया जा रहा है। हालांकि सरयू कटान करते हुए बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

पुराना मंजर देख सहमे ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि करीब 24 वर्ष पहले भी नदी इसी तरह मंदिरों के आसपास पहुंचकर थमी थी। इस बार भी हालात लगभग वैसे ही बन गए हैं। पूर्व भाजपा विधायक राजलक्ष्मी वर्मा ने बताया कि उस समय उन्होंने सरकार से प्रयास कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कराई थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन सपा सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। उनका कहना है कि यदि उस समय कार्य हो जाता तो केदारीपुर और हेतमापुर गांव आज नदी के कटान से सुरक्षित होते।

वही तहसीलदार रामनगर विपुल सिंह का कहना है कि कटान रोकने के उपाय किए जा रहे हैं । बाढ़ से पीड़ित सभी ग्रामीणों को सरकार द्वारा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। तहसील के लेखपाल व कर्मचारी बराबर बाढ़, कटान से पीड़ित गांवो में लगकर समस्याओं को सुनकर निस्तारण कर रहे हैं। जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी बाराबंकी स्वयं बाढ़ पीड़ित गांव के प्रत्येक बिंदु की जानकारी ले रहे हैं। नायब तहसीलदार को मौके पर लगाया गया है। उप जिलाधिकारी व मैं स्वयं व्यवस्था देख रहा हूँ। कि किसी भी ग्रामीण को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो, मुझे जैसे ही कोई जानकारी होती है मैं तुरंत ही निस्तारण करवाने का प्रयास करता हूं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी