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पत्रकारिता से लेकर शोध केन्द्र तक, सीएसजेएमयू में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन

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पत्रकारिता से लेकर शोध केन्द्र तक, सीएसजेएमयू में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन


कानपुर, 07 जुलाई (हि.स.)। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में मंगलवार को विभिन्न विभागों और स्कूलों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, शोध संस्कृति, छात्र सुविधाओं और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और दीनदयाल शोध केन्द्र के कार्यक्रमों में वक्ताओं ने विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर ज्ञान, कौशल और संस्कार के माध्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के दीक्षारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एक समाचार पत्र के संपादक आशीष त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता में सफलता के लिए धैर्य, संवेदनशीलता और स्पष्ट अभिव्यक्ति सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जुनून को ही अपना पेशा बनाने की सलाह देते हुए कहा कि पत्रकार का लिखा शब्द समाज से सीधा संवाद करता है, इसलिए उसकी भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए। उन्होंने नियमित अध्ययन, पुस्तकों से जुड़ाव और मजबूत अवलोकन क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि व्यक्तित्व का निर्माण भाव और विचारों के संतुलन से होता है।

कार्यक्रम में चीफ प्रॉक्टर प्रो. शशिकांत त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के नियमों और अनुशासन की जानकारी दी। डॉ. अंकित त्रिवेदी ने सुरक्षा व्यवस्था और एनसीसी, डॉ. आशीष तिवारी ने पुस्तकालय, डॉ. द्रौपदी यादव ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), डॉ. रजनीश तिवारी ने खेल एवं योग तथा डॉ. स्नेह पांडे ने छात्रावास की सुविधाओं की जानकारी दी। विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें अनुशासन और समर्पण के साथ अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

उधर, दीनदयाल शोध केन्द्र में आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध संस्कृति और मूल्यपरक शिक्षा से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। केन्द्र के निदेशक प्रो. दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, नैतिक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, समय प्रबंधन और शोधपरक सोच विकसित करने का आग्रह किया।

मुख्य अतिथि एवं डीएवी कॉलेज के पूर्व आचार्य प्रो. अनिल कुमार सिन्हा ने भारतीय शिक्षा परंपरा को व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से गुरु-शिष्य परंपरा, स्वाध्याय और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की अपील की। वरिष्ठ आचार्य डॉ. श्रवण कुमार द्विवेदी ने शिक्षा को जीवन साधना बताते हुए कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह चरित्र और कर्तव्यबोध का भी विकास करे।

कार्यक्रम में सह-निदेशक डॉ. मानस उपाध्याय और सहायक आचार्य संगम बाजपेई ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, शोध गतिविधियों और विश्वविद्यालय की विभिन्न सुविधाओं की जानकारी दी। दोनों कार्यक्रमों में शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय जीवन का अधिकतम लाभ उठाते हुए अध्ययन, शोध, नवाचार और सामाजिक दायित्वों के प्रति सक्रिय रहने का आह्वान किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप