home page

ब्राज़ील से कानपुर तक : सीएसजेएमयू का ‘एमए इन हिंदू स्टडीज़’ बना विदेशी छात्रों का आकर्षण

 | 
ब्राज़ील से कानपुर तक : सीएसजेएमयू का ‘एमए इन हिंदू स्टडीज़’ बना विदेशी छात्रों का आकर्षण


ब्राज़ील से कानपुर तक : सीएसजेएमयू का ‘एमए इन हिंदू स्टडीज़’ बना विदेशी छात्रों का आकर्षण


कानपुर, 27 अप्रैल (हि.स.)। सीएसजेएमयू का ‘एमए इन हिंदू स्टडीज़’ पाठ्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से पहचान बना रहा है। विदेशी छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए यहां आ रहे हैं, जो विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। यह कोर्स भारतीय संस्कृति, दर्शन और विज्ञान के समन्वित अध्ययन का अवसर देता है। हमारा उद्देश्य इसे वैश्विक मंच पर स्थापित करना है। यह बातें सोमवार को स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज की निदेशक डॉ. किरण झा ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) का ‘एमए इन हिंदू स्टडीज़’ पाठ्यक्रम अब वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह कोर्स न केवल भारतीय छात्रों बल्कि विदेशी छात्रों को भी आकर्षित कर रहा है, जो भारतीय संस्कृति और वैदिक ज्ञान परंपरा को गहराई से समझना चाहते हैं।

इस बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता का एक उदाहरण ब्राज़ील के रेसिफ़ शहर से आए छात्र मार्सेलो हैं। उन्होंने हिंदू दर्शन में अपनी गहरी रुचि के चलते भारत आकर इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। उनके अनुसार, उनके देश में इस विषय पर अध्ययन के सीमित अवसर थे, जबकि सीएसजेएमयू ने उन्हें व्यापक और व्यवस्थित अध्ययन का मंच प्रदान किया।

यह पाठ्यक्रम यूजीसी ढांचे के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसमें वैदिक ज्ञान, दर्शन, गणित, चिकित्सा और मौसम विज्ञान जैसे विषयों को शामिल किया गया है। चार सेमेस्टर में पूर्ण होने वाले इस कोर्स में कुल 16 विषय पढ़ाए जाते हैं, जिससे छात्रों को बहुआयामी दृष्टिकोण मिलता है।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए इसकी किफायती फीस भी एक बड़ा आकर्षण है। इस पाठ्यक्रम की वार्षिक फीस मात्र 11,200 रुपये है, जिससे यह अन्य प्रमुख संस्थानों की तुलना में अधिक सुलभ बन जाता है। इसी कारण कई विदेशी छात्र इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

मार्सेलो की रुचि हिंदू दर्शन में बचपन से ही रही है। उनके पारिवारिक परिवेश में योग और आध्यात्मिक विचारों का प्रभाव रहा, जिसने उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर प्रेरित किया। यहां अध्ययन के दौरान वे ‘श्रुति’, ‘अद्वैत वेदांत’ और शंकराचार्य की शिक्षाओं का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय का यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां अध्ययन करने वाले विदेशी छात्र अपने देशों में भारतीय संस्कृति के संवाहक बनकर उभर रहे हैं, जिससे भारत की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिल रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप