क्षमा से क्रोध का अंत और मन में शांति का संचार होता है : मुनि डॉ. संयमरत्न विजय
कानपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। क्षमायाचना केवल कार्ड या संदेश के माध्यम से नहीं, बल्कि दिल से करनी चाहिए। क्रोध का प्रतिशोधक तत्व क्षमा है। जहां क्रोध है वहां प्रतिशोध और जहां क्षमा है, वहां प्रतिबोध है। भूल होना मानव का स्वभाव है, लेकिन उसे क्षमा कर देना दिव्यता है। यह बातें मुनि डॉ. संयमरत्न विजयजी ने शुक्रवार को आयोजित सामूहिक सांवत्सरिक क्षमायाचना कार्यक्रम में कहीं।
जैन सोशल ग्रुप कानपुर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जैन समुदाय के चारों पंथों का 27वां सामूहिक सांवत्सरिक क्षमायाचना पर्व मनाया गया। इस दौरान पर्युषण पर्व के बीच आठ या उससे अधिक उपवास करने वाले तपस्वियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र के जाप से हुई। मुख्य अतिथि केस्को की एमडी नेहा जैन और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन रहे।
मुनि डॉ. संयमरत्न विजयजी और मुनि भुवनरत्न विजयजी ने कहा कि क्रोध के समय यदि व्यक्ति एक मिनट शांत हो जाए तो वह कई दिनों के दुख से बच सकता है। मनुष्य की शोभा रूप से, रूप की शोभा गुण से, गुण की शोभा ज्ञान से और ज्ञान की शोभा क्षमा से होती है। संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद सकल जैन श्रीसंघ ने परस्पर क्षमायाचना कर वैर भाव समाप्त करने का संदेश दिया।
साध्ववी श्रुतदर्शनाश्री ने कहा कि पर्युषण महापर्व केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मलोकन और आत्मशुद्धि का अवसर है। क्षमा इस पर्व की आत्मा है। व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ और राग-द्वेष को धीरे-धीरे दूर करना चाहिए। क्षमा को केवल एक दिन का पर्व न बनाकर जीवन की साधना बनाना चाहिए। जैन सोशल ग्रुप की अध्यक्ष जसमीन शाह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह लगातार 27वां अवसर है, जब चारों पंथों का सामूहिक सांवत्सरिक क्षमापना कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उपमंत्री प्रीति बेताला ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि जैन सोशल ग्रुप विभिन्न विचारधाराओं के बीच समन्वय स्थापित कर समाज को एकजुट रखने का प्रयास करता है। संस्था के 61 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
कार्यक्रम में प्रियंका जैन, बिन्दु शाह और रीता जैन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अंजिका जैन, अमी शाह, शिल्पा शाह और दीपाली शाह समेत पदाधिकारियों ने तपस्वियों को माला पहनाकर और उपहार देकर सम्मानित किया। इस दौरान हरीश शाह, दिलखुश जैन, संतोष जैन, प्रिंस जैन, शैलेन्द्र जैन, देवेन्द्र लोढ़ा समेत विभिन्न जैन संघों के प्रतिनिधि और समाज के लोग मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

