खाद्य प्रतिष्ठानों में अब लाइसेंस से लेकर तापमान रिकॉर्ड तक रखना होगा दुरुस्त
लखनऊ, 03 अक्टूबर (हि.स.)। प्रदेश में उपभोक्ताओं को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, उत्तर प्रदेश ने सभी खाद्य कारोबारियों के लिए खाद्य सुरक्षा अनुपालन के महत्वपूर्ण चेक बिंदु जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य प्रतिष्ठानों में लाइसेंस एवं पंजीकरण से लेकर परिसर की स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के भंडारण, तापमान नियंत्रण, उपकरणों की सफाई, कीट नियंत्रण, खाद्य अपशिष्ट के निस्तारण और अभिलेखों के रखरखाव तक निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है।
खाद्य कारोबारियों को अपने कारोबार की प्रकृति के अनुसार एफएसएसएआई लाइसेंस/पंजीकरण प्राप्त करना होगा तथा प्रतिष्ठान में उचित स्थान पर खाद्य लाइसेंस, पंजीकरण और खाद्य सुरक्षा प्रदर्शन बोर्ड प्रदर्शित करना होगा। उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप’ का क्यूआर कोड भी प्रमुख स्थान पर लगाया जाएगा।
स्वच्छ परिसर और सुरक्षित खाद्य तैयारी पर जोर
विभाग के निर्देशों के अनुसार खाद्य प्रतिष्ठान में पर्याप्त स्थान, वेंटिलेशन और प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। खिड़कियों एवं दरवाजों पर ऐसी जाली हो, जिससे कीटों का प्रवेश न हो। फर्श, दीवार, छत, वाश एरिया और खाद्य तैयारी क्षेत्र टूटी-फूटी अवस्था में नहीं होने चाहिए। किचन में जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो तथा गंदे पानी का ठहराव न हो। दैनिक कार्यों में अच्छी निर्माण एवं अच्छी स्वच्छता प्रक्रियाओं का पालन और पर्याप्त ड्रेनेज, वेंटिलेशन तथा हाथ धोने की सुविधा सुनिश्चित करनी होगी।
भोजन के संपर्क में आने वाले उपकरण एवं बर्तन जंगरोधी तथा आसानी से साफ होने योग्य हों। घर ले जाने और घर पहुंचाने वाली पैकेजिंग खाद्य-ग्रेड की हो तथा उस पर शाकाहारी/मांसाहारी चिह्न स्पष्ट हो। कच्चे माल की खरीद के समय गुणवत्ता, समाप्ति तिथि, क्षति, रिसाव एवं संदूषण की जांच तथा शाकाहारी और मांसाहारी कच्चे माल का अलग भंडारण जरूरी होगा।
तापमान नियंत्रण और भंडारण में सावधानी
तापमान नियंत्रित खाद्य पदार्थों के परिवहन, भंडारण और प्राप्ति के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखना होगा। सभी रेफ्रिजरेटर एवं डीप फ्रीजर का तापमान प्रदर्शित करने के साथ उसका रिकॉर्ड रखना होगा। जमे हुए खाद्य पदार्थों को माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तथा ठंडी अवस्था वाले खाद्य पदार्थों को 5 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर रखना होगा।
पके भोजन को दोबारा उपयोग से पहले 74 डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर कम से कम चार मिनट की अवधि में सुरक्षित रूप से पुनः गर्म करना होगा। कच्चे, पके, अर्द्ध-पके और तैयार-खाने योग्य खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखना होगा। अर्द्ध-पके और पहले से तैयार भोजन का भंडारण निर्धारित तापमान, लेबल और शेल्फ अवधि के अनुसार होगा। बर्फ खाद्य पदार्थ के संपर्क में आने पर केवल पीने योग्य पानी से बनी होनी चाहिए।
सफाई, कीट नियंत्रण और खाद्य अपशिष्ट पर सख्ती
किचन प्लेटफॉर्म, उपकरण, बर्तन और खाद्य-संपर्क सतहों की नियमित सफाई का कार्यक्रम बनाना होगा। डिटर्जेंट, कीटाणुनाशक और फर्श साफ करने वाले रसायन खाद्य तैयारी क्षेत्र में नहीं रखे जाएंगे। पीने योग्य पानी का उपयोग, जल टैंक एवं आरओ इकाई की नियमित सफाई और अभिलेख रखना जरूरी होगा। नियमित कीट नियंत्रण तथा उसका प्रमाण और रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।
खाद्य अपशिष्ट को अलग कर पैडल से संचालित ढक्कनयुक्त कूड़ेदान में डालना होगा और किचन में कूड़े का ढेर नहीं लगने देना होगा। खाद्य तेल की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाएगी। तेल में हानिकारक तत्वों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने से पहले ही उसे बदलना अनिवार्य होगा।
भोजन बनाने वाले कर्मचारियों को बाल ढकने का जाल, दस्ताने और एप्रन पहनना होगा। संक्रामक अथवा त्वचा रोग से पीड़ित व्यक्ति को खाद्य कार्य से दूर रखना होगा।
मेन्यू कार्ड में इस्तेमाल खाद्य तेल का उल्लेख करना होगा। प्रतिबंधित रंग, रसायन और तरल नाइट्रोजन का प्रयोग नहीं किया जाएगा। केंद्रीय लाइसेंस अथवा 10 या अधिक प्रतिष्ठानों वाले कारोबारियों के लिए मेन्यू कार्ड अनिवार्य होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

