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राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर

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राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर


अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान देना होगा विद्यार्थियों को : प्रो. रवि शंकर

गोरखपुर, 22 अगस्त (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में साप्ताहिक समारोह का शुभारंभ शनिवार को हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में व्याख्यानमाला, विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा गतिविधियों की शुरुआत हुई।

स्थापना सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने कहा कि युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के आदर्शों और मूल्यों के अनुरूप स्थापित यह विश्वविद्यालय पांच वर्ष में ही राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का उत्कृष्ट एवं प्रमुख केंद्र बन गया है। महंतद्वय की स्मृति में शनिवार से प्रारंभ व्याख्यानमाला के पहले दिन ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, कृषि, चिकित्सा : नवप्रवर्तक भारत के लिए’ विषय पर अपनी बात रखते हुए प्रो. रवि शंकर सिंह ने कहा कि भारत के वर्तमान और भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए व्याख्यान के उक्त सभी विषय अत्यंत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं।

प्रो. सिंह ने कहा एमजीयूजी के कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, कृषि और चिकित्सा के महत्व को उच्च शिक्षा में नवाचार के साथ प्रतिष्ठित करने के लिए इस विश्वविद्यालय को एक मॉडल रूप में विकसित किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नव प्रवर्तकों का वर्चस्व होगा इसलिए विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा भारत की अर्थव्यवस्था का केंद्र कृषि है और इसमें नवाचार की सर्वाधिक संभावना है। इसी तरह जीवन सुगम बनाने के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी और जन स्वास्थ्य के उन्नयन के लिए लिए चिकित्सा क्षेत्र में जारी नवाचार को और बढ़ावा देना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने शैक्षणिक जीवन के साथ राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझें।

साप्ताहिक कार्यक्रम के शुभारंभ और व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, राष्ट्रसेवा, अनुशासन, नेतृत्व एवं सामाजिक दायित्व के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों को अंगीकार कर इस विश्वविद्यालय ने अल्प समय में मजबूत पहचान बनाई है। इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय दिग्विजयनाथ जी महाराज और अवेद्यनाथ जी महाराज के विचारों से सिंचित परिसर में अध्ययन का अवसर मिला है। दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व, कृतित्व, लोककल्याण एवं राष्ट्रसेवा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को स्मरण करते हुए कुलपति ने उनके आदर्शों एवं विचारों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बताया।

कार्यक्रम में स्वागत एवं अतिथियों का परिचय फैकल्टी ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल की डीन डॉ. डी.एस. अजीथा ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, डॉ. हरिओम, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. विमल कुमार दुबे, डॉ. गिरधर वेदांतम, उप कुलसचिव श्रीकांत सहित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय