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जवाब देने के बजाय सोचने और तर्क करने की क्षमता विकसित करेगा ‘फर्मी एआई’

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जवाब देने के बजाय सोचने और तर्क करने की क्षमता विकसित करेगा ‘फर्मी एआई’


कानपुर, 05 नवंबर (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के बीच छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने शिक्षण व्यवस्था में नई पहल की है। विश्वविद्यालय में गुरुवार को शिक्षकों को ‘फर्मी एआई’ टूल के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इसकी खासियत यह है कि यह विद्यार्थियों को सीधे उत्तर देने के बजाय किसी समस्या को समझने, उस पर तार्किक विचार करने और चरणबद्ध तरीके से समाधान तक पहुंचने में मदद करता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाइफ साइंस, बेसिक साइंस, इंजीनियरिंग और ह्यूमैनिटीज के 30 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

विश्वविद्यालय का जोर शिक्षण, अध्ययन और शोध में एआई के सार्थक उपयोग को बढ़ावा देने पर है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल एआई तकनीक को अपनाना नहीं, बल्कि उसे शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ाने का माध्यम बनाना है।

फर्मी एआई को आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती और उनकी टीम ने विकसित किया है। सामान्य एआई टूल जहां सवाल पूछने पर सीधे जवाब उपलब्ध कराते हैं, वहीं फर्मी एआई समाधान तक पहुंचने की प्रक्रिया, उसके पीछे के तर्क और विभिन्न चरणों को समझने पर जोर देता है। इसका उपयोग गणित, ज्यामिति, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोस्टैटिस्टिक्स और लॉजिक जैसे विषयों में किया जा सकता है।

कार्यक्रम का आयोजन डीन एकेडमिक्स प्रो. बृष्टि मित्रा ने प्रो. आलोक कुमार और प्रो. दीपक वर्मा के सहयोग से किया। प्रशिक्षण CAM-AI पहल और एआई प्रज्ञा के अंतर्गत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को एआई के प्रति दक्ष बनाते हुए उच्च शिक्षा में तार्किक चिंतन, स्वतंत्र समस्या समाधान और नवाचार की संस्कृति विकसित करना है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप