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किण्वित जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन में सुधार संभव : डॉ. राम पलट

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किण्वित जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन में सुधार संभव : डॉ. राम पलट


कानपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मिट्टी के भौतिक और रासायनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में किण्वित जैविक खाद की भूमिका है। जैविक खेती में इसके सही उपयोग से मिट्टी की उर्वरता के साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन भी बेहतर किया जा सकता है। यह जानकारी सोमवार को केवीके के प्रभारी अधिकारी डॉ. राम पलट ने औरैया के किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई), नई दिल्ली की सीएसआर-मारुति परियोजना के तहत किण्वित जैविक खाद एवं संतुलित पोषण प्रबंधन विषय पर किसान प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें औरैया के गांवों से पहुंचे पचास किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम आईएआरआई के सस्य विज्ञान संभाग के अध्यक्ष एवं परियोजना समन्वयक डॉ. एसएस राठौर व उद्यान विज्ञान संभाग के डॉ. जय प्रकाश के मार्गदर्शन में हुआ। डॉ. राम पलट ने किण्वित जैविक खाद के प्रयोग और जैविक खेती में भूमिका बताई। उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से मिट्टी के भौतिक और रासायनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. रश्मि यादव ने संतुलित पोषण प्रबंधन और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में किण्वित जैविक खाद के योगदान पर जानकारी दी। डॉ. प्रवीन कुमार ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रसायन-मुक्त खेती की ओर बढ़ना जरूरी है। प्रमोद कुमार ने बताया कि किण्वित जैविक खाद फसलों, विशेष रूप से सब्जियों के उत्पादन में उपयोगी है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में आईएआरआई परियोजना टीम के सदस्य डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. कपिला शेखावत, डॉ. आंचल, डॉ. सुभाष, डॉ. ऋषि राज, डॉ. प्रवीण कुमार उपाध्याय, डॉ. विशाल त्यागी, डॉ. मोना, डॉ. अर्जुन सिंह व डॉ. स्मृति रंजन प्रधान का योगदान रहा। किसानों के साथ समन्वय और मंच संचालन में मयंक प्रताप, दीपांशु यादव और निर्मल कमल ने भूमिका निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप