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आर्मी पब्लिक स्कूल फतेहगढ़ में ब्रिगेडियर की देख रेख में मनाया गया अंतराष्ट्रीय योग दिवस

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आर्मी पब्लिक स्कूल फतेहगढ़ में ब्रिगेडियर की देख रेख में मनाया गया अंतराष्ट्रीय योग दिवस


फर्रुखाबाद,21जून (हि.स.)।

आर्मी पब्लिक स्कूल फतेहगढ़ में बारहवाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ गायत्री मन्त्र एवं योग शास्त्र के प्रणेता महर्षि पतञ्जलि की योग प्रार्थना के साथ हुआ।

विद्यालय के शिक्षक सर्वेश कुमार मिश्र ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र को सम्बोधित करते हुए विश्व समुदाय से अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का आह्वान किया था। उनके इस प्रस्ताव के समर्थन में 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 177 सदस्य देशों ने 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया। तभी से प्रतिवर्ष 21 जून को सम्पूर्ण विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को विश्व के 192 से अधिक देशों में मनाया गया था।

इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक थीम “स्वास्थ्य, ज्ञान और विश्व शान्ति के लिए योग” रही। यह थीम वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य संवर्धन, मानसिक स्पष्टता एवं अन्तर्राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सर्वेश कुमार मिश्र ने सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया। इसके उपरान्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अभ्यास क्रम के अनुसार सूक्ष्म व्यायाम, विभिन्न योगासन तथा प्रणव, भस्त्रिका एवं कपालभाति जैसे प्राणायामों का कुशलतापूर्वक अभ्यास कराते हुए उनके लाभों के बारे में विस्तार से बताया।

विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी ने सभी उपस्थित योग साधकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति—ये पाँच प्रमुख चित्तवृत्तियाँ हैं, जिन पर नियन्त्रण करना ही योग है। योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है।

उन्होंने अष्टांग योग की व्याख्या करते हुए बताया कि अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह पाँच यम हैं। शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय एवं ईश्वर-प्रणिधान पाँच नियम हैं। स्थिर एवं सुखपूर्वक बैठने की क्रिया आसन, श्वासों को नियमित करने की क्रिया प्राणायाम, बाह्य विषयों से मन को हटाना प्रत्याहार, एक लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना धारणा, उसी लक्ष्य का निरन्तर चिन्तन ध्यान तथा ध्यान का चैतन्य में विलय होना समाधि कहलाता है। उन्होंने कहा कि अष्टांग योग के माध्यम से हम अपनी इन्द्रियों को संयमित कर शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

योग सत्र के समापन से पूर्व सभी योग साधकों ने सम्पूर्ण विश्व में प्रेम, सौहार्द, एकात्मता एवं शान्तिपूर्ण वातावरण स्थापित करने का संकल्प लिया।

विद्यालय की कार्यवाहक प्रधानाचार्या श्रीमती एकता साध ने कहा कि “कर्मों में कुशलता ही योग है।” विभिन्न योगिक क्रियाओं से मन संयमित होता है तथा सकारात्मक विचारों का विकास होता है। योग व्यक्ति को तनावमुक्त बनाकर स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

विद्यालय के चेयरमैन, ब्रिगेडियर मनीष कुमार जैन ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए सभी से योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि अनुशासित, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करता है।

सत्र का समापन विश्व के समस्त प्राणियों के कल्याण, सुख एवं निरोगी जीवन की कामना के साथ शान्ति पाठ द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट्स तथा विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar