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मृदा परीक्षण की आवश्यकता और पोषक तत्वों की कृषि वैज्ञानिकों ने दी जानकारी

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मृदा परीक्षण की आवश्यकता और पोषक तत्वों की कृषि वैज्ञानिकों ने दी जानकारी


कानपुर, 26 मार्च (हि.स.)। “मृदा के सूक्ष्म एवं द्वितीय पोषक तत्व फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके संतुलित उपयोग से बेहतर उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।” यह बातें गुरुवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र विजय कुमार यादव ने कहीं।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा संचालित परियोजना के अंतर्गत ग्राम फंदा, विकासखंड मैथा में एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गौण एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का मृदा स्वास्थ्य पर प्रभाव विषय पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें किसानों को उर्वरक प्रबंधन और संतुलित पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. सर्वेश कुमार ने किसानों को मृदा परीक्षण की आवश्यकता और पोषक तत्वों के सही उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उपायों पर प्रकाश डाला।

वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र कुमार ने सूक्ष्म एवं द्वितीय पोषक तत्वों की भूमिका को समझाते हुए किसानों को उनके उपयोग के वैज्ञानिक तरीके बताए। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. निमिषा अवस्थी, डॉ. खलील खान, डॉ. शशिकांत सहित विभाग के अन्य वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गांव के सौ से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप