बिजली पानी और अन्ना पशुओं की समस्याओं को लेकर किसानों ने किया आत्मदाह का प्रयास
कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद शांत हुए किसान
बांदा, 16 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में बबेरू तहसील क्षेत्र के बिसंडा बिजली घर में बिजली, पानी और अन्ना मवेशियों की समस्या से परेशान किसानों का आक्रोश रविवार को उस समय बढ़ गया, जब पूर्व में दिए गए लिखित आश्वासन के बावजूद 16 दिन बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। आक्रोशित समाजसेवी एवं जनसेवक पीसी पटेल ने किसानों के साथ रविवार को आत्मदाह का प्रयास किया। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त बांदा-चित्रकूट अजीत कुमार के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
दरअसल, क्षेत्र के किसान धान की फसल को बचाने के लिए अन्ना मवेशियों, पानी और विद्युत संकट से जूझ रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर किसानों ने पूर्व में बिसंडा बिजली घर पर चार दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन किया था। अनशन के दौरान मंडलायुक्त के प्रतिनिधि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी बांदा अजय पाण्डेय संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, पूर्व मंत्री एवं वर्तमान सांसद के पति शिवशंकर सिंह पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किसानों को सात दिनों के भीतर बिंदुवार समस्याओं का समाधान कराने का लिखित आश्वासन दिया गया था।
किसानों का आरोप है कि सात दिन के बजाय 16 दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर किसी समस्या का ठोस समाधान नहीं हुआ। इससे नाराज समाजसेवी पीसी पटेल और किसानों ने रविवार को बिसंडा बिजली घर परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से आत्मदाह का प्रयास करने का निर्णय लिया।
मामले की जानकारी मिलते ही उपजिलाधिकारी अतर्रा संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों के साथ आमने-सामने बैठकर पूर्व में दिए गए लिखित आश्वासन के तहत किए गए कार्यों की जानकारी ली। किसानों ने अधिकारियों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी बिंदु पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है और समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
इसी दौरान किसानों और प्रशासन के बीच कहासुनी की स्थिति बन गई। पीसी पटेल ने मंडलायुक्त बांदा-चित्रकूट अजीत कुमार से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों के रवैये और किसानों की समस्याओं के समाधान न होने की शिकायत की। मंडलायुक्त ने मामले में अपर जिलाधिकारी बांदा को भेजने की बात कही।
पीसी पटेल के मुताबिक, इसी बीच उपजिलाधिकारी अतर्रा ने किसानों को पुलिस बुलाकर गिरफ्तार कराने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने दोबारा मंडलायुक्त से फोन पर बात कर किसानों के साथ कथित अभद्र व्यवहार की जानकारी दी। मंडलायुक्त ने हस्तक्षेप करते हुए एसडीएम को किसानों की समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान कराने और लापरवाही करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद उपजिलाधिकारी अतर्रा ने किसानों से माफी मांगते हुए दो दिन के भीतर जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान कराने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद पीसी पटेल ने प्रशासन को सहयोग करने की बात कही और किसान शांत हुए।
किसानों के विरोध को देखते हुए बिसंडा पावर हाउस रविवार को पुलिस छावनी में तब्दील रहा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन में क्षेत्र के दर्जनों गांवों से पहुंचे सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
किसानों का कहना है कि यदि तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

