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1857 की जनक्रांति के नायकों को सम्मान दिलाने की मांग के साथ ‘चंबल मिशन’ का प्रथम चरण संपन्न

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1857 की जनक्रांति के नायकों को सम्मान दिलाने की मांग के साथ ‘चंबल मिशन’ का प्रथम चरण संपन्न


औरैया, 31 मई (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद व इटावा भारतवर्ष की पूर्ण स्वतंत्रता का उद्घोष ‘ऐलान-ए-मुकम्मल आज़ादी’ 1857 की वर्षगांठ के अवसर पर चंबल फाउंडेशन परिवार द्वारा चकरनगर स्थित खंडहर में तब्दील राजा निरंजन सिंह चौहान की राजगढ़ी में दो माह से चल रहे ‘चंबल मिशन’ अभियान कार्यक्रम के प्रथम चरण का समापन किया गया। ‘पूर्ण स्वतंत्रता दिवस’ कार्यक्रम का उद्घाटन महान क्रांति योद्धा जीता चमार के वंशज बलराम सिंह, राजा निरंजन सिंह चौहान के वंशज कुंवर मोहन सिंह, मारून सिंह लोधी के वंशज संजय राजपूत तथा जंगली-मंगली मेहतर के वंशज आकाश ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में क्रांतिकारी वंशज एवं चंबल संग्रहालय के संस्थापक डॉ. शाह आलम राणा ने कहा कि वर्ष 1857 केवल सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि किसानों, राजाओं और आम जनता का सामूहिक शंखनाद था। इस जनक्रांति में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को उखाड़ फेंककर अपनी सरकार स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा कि 1857 की जनक्रांति में पूरा चंबल अंचल क्रांतिकारी राजा निरंजन सिंह चौहान के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध एकजुट होकर आजादी की लड़ाई में शामिल हुआ था।

इस अवसर पर ‘1857 की क्रांति और शहीदों के सपनों का भारत’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में ओम प्रकाश कुशवाह, अशोक सोनी निडर, बालमुकुंद सिंह चौहान एडवोकेट, रामजनम सिंह, चंद्रभूषण सिंह चौहान, देव कबीर, प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार, हरविलास सिंह एडवोकेट, डॉ. कमल कुमार कुशवाहा, शेखर चौहान, महेंद्रपाल सिंह चौहान, सुनील कुमार यादव और हरेंद्र कुमार सहित अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन चंद्रोदय सिंह चौहान ने किया। चंबल मिशन अभियान को हजारों लोगों ने कागज और कपड़े पर हस्ताक्षर अथवा अंगूठा लगाकर अपना समर्थन दिया। अभियान के समापन पर चकरनगर राजगढ़ी से लेकर क्रांति योद्धा जंगली-मंगली मेहतर के घर तक हस्ताक्षरित कपड़े के साथ मार्च निकाला गया।

चंबल फाउंडेशन परिवार ने सरकार के समक्ष 14 सूत्रीय मांगपत्र भी रखा, जिसमें 1857 के गुमनाम क्रांतिवीरों की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर के ‘चंबल शौर्य स्मारक’ का निर्माण, चंबल केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना, स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर संस्थानों एवं सड़कों का नामकरण, क्रांतिकारियों पर आधिकारिक पुस्तकों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण, शौर्यगाथाओं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना, मूर्तियों की स्थापना, लाइट एंड साउंड शो का आयोजन, पर्यटन विकास, स्मारक डाक टिकट जारी करना, सेनानी परिवारों को राजकीय सम्मान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा चंबल क्षेत्र के समग्र विकास की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही। कार्यक्रम में भोला प्रसाद निषाद, प्रत्यूष रंजन द्विवेदी, ब्रह्मानंद प्रधान, विनोद सिंह, चंद्रवीर चौहान, अमर सिंह तोमर, रामबरन, महेंद्रपाल सिंह चौहान, अजय कुमार, शरद पटेल, गौतम शाक्य, सोनू गौतम सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार