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योगी सरकार में शिक्षा और चिकित्सा का हब बन रहा गोरखपुर

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योगी सरकार में शिक्षा और चिकित्सा का हब बन रहा गोरखपुर


योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से गोरखपुर को मिल चुकी है एम्स की सौगात

*सीएम योगी के विजन से प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय भी गोरखपुर में

गोरखपुर, 25 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के नौ वर्ष का कार्यकाल गोरखपुर में शिक्षा और चिकित्सा क्सेक्टर के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हुआ है। सीएम योगी के विजनरी प्रयासों से गोरखपुर, समूचे पूर्वांचल और बिहार-नेपाल तक के सीमाई इलाके के लिए शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र का हब बनकर उभर रहा है।

आजादी के बाद से लेकर 2017 तक गोरखपुर दो विश्वविद्यालयों (दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय व मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) वाला जिला था। योगी सरकार में इसमें दो और नए विश्वविद्यालयों की क्रियाशीलता की उपलब्धि दर्ज हुई है। नए विश्वविद्यालयों में से एक महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री के एक महत्वपूर्ण ड्रीम प्रोजेक्ट का साकार रूप है। यह राज्य का पहला आयुष विश्वविद्यालय भी है। जबकि दूसरा, निजी क्षेत्र का महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय भी मुख्यमंत्री के संकल्प का प्रतिफल है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना गोरक्षपीठ के शैक्षिक प्रकल्प महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत की गई है। योगी आदित्यनाथ, गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। आने वाले दिनों में गोरखपुर की उपलब्धियों में एक और विश्वविद्यालय का नाम जुड़ जाएगा। गोरखपुर के पांचवें विश्वविद्यालय के रूप में प्रदेश के पहले वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय के स्थापना की सीएम योगी की घोषणा के बाद प्रक्रियात्मक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

योगी सरकार के नौ साल में गोरखपुर में शैक्षिक क्षेत्र का विस्तारित होता आयाम और बढ़ती ख्याति ही है कि जहां दशकों तक देश के महामहिम राष्ट्रपति का आना कल्पना की बात लगती थी वहीं विगत सात वर्ष में दो राष्ट्रपति का तीन बार आगमन सिर्फ शैक्षिक-अकादमिक कार्यक्रमों में हुआ। दो राष्ट्रपति के तीन बार अकादमिक केंद्रित गोरखपुर आगमन पर उनकी सहभागिता कुल छह ऐसे कार्यक्रमों में रही जो विशुद्ध शिक्षा क्षेत्र से संबंधित रहे।

आज का गोरखपुर शिक्षा के सभी वैषयिक रूपों के लिए विशिष्ट अध्ययन केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। यहां परंपरागत पाठ्यक्रमों के साथ ही व्यावसायिक, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा एवं इससे संबद्ध अन्य पाठ्यक्रम (नर्सिंग, फार्मेसी आदि), आयुष चिकित्सा शिक्षा के महत्वपूर्ण और ख्यातिलब्ध संस्थान तो हैं ही, सैन्य प्रशिक्षणयुक्त शिक्षा के लिए सैनिक स्कूल का भी उपहार मिल चुका है। श्रमिक पाल्यों के लिए अटल आवासीय विद्यालय की सुविधा मिल रही है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का तेजी से कायाकल्प हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में गोरखपुर के बढ़ते महत्व को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि इसके आसपास के जिलों के अलावा बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग बच्चों की पढ़ाई के लिए ही गोरखपुर आकर बस रहे हैं। सरकार जहां हर प्रकार की शिक्षा के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है तो वहीं निजी क्षेत्र की भागीदारी मेट्रो शहरों जैसी दिखने लगी है। देश और प्रदेश में खुद को ब्रांड समझने वाले कई विद्यालयों की शाखाएं यहां खुल चुकी हैं।

शिक्षा के साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में भी विगत नौ वर्षों में गोरखपुर ने तीव्र प्रगति की है। दशकों तक जिस गोरखपुर को बीमारू मान लिया गया था, वहां वर्ष 2017 से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आया व्यापक परिवर्तन कभी कभी अकल्पनीय सा लगता है। कभी यहां चिकित्सा का एकमात्र बड़ा केंद्र बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही था, उसकी दशा भी लचर थी। पर, सीएम योगी के प्रयास से न केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज अब सुपर स्पेशयलिटी सेवाओं का केंद्र बन गया बल्कि योगी के प्रयासों से गोरखपुर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की भी सौगात मिल चुकी है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज में इस अंचल में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा हॉस्पिटल भी तेजी से आकार ले रहा है। यहां जटिल कैंसर की सर्जरी के लिए प्रतिमाह आयोजित कैम्प में अन्य राज्यों के मरीज भी पहुंच रहे हैं। मॉडर्न मेडिसिन के साथ ही आयुष पद्धति से इलाज के लिए गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय में भी इलाज की सुविधा का लाभ समूचा पूर्वी उत्तर उठा रहा है। आज के गोरखपुर में सरकारी चिकित्सा तंत्र सुदृढ़ हुआ है तो निजी क्षेत्र के भी कई प्रतिष्ठित हॉस्पिटलों की श्रृंखला खड़ी हो रही है।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव का कहना है कि उत्कृष्ट शिक्षा और चिकित्सा किसी भी विकसित समाज के लिए अपरिहार्य आवश्यकता है। यह दोनों ही सेक्टर योगी आदित्यनाथ के लिए राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि निजी संकल्प से जुड़े हुए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के जरिये इन दोनों सेक्टर को नया आयाम दिया तो मुख्यमंत्री के रूप में इसे लगातार ऊंचाई पर पहुंचा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय