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अब पौधों को स्कैन कर औषधीय तत्व बताएगा एआई

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अब पौधों को स्कैन कर औषधीय तत्व बताएगा एआई


गोरखपुर, 24 मार्च (हि.स.)। अब दवा खोजने की प्रक्रिया और भी तेज, सटीक और किफायती होने जा रही है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. तूलिका मिश्रा ने एक ऐसी उन्नत एआई तकनीक विकसित की है, जो पौधों को स्कैन कर उनमें मौजूद औषधीय तत्वों की पहचान कर सकती है। इस अभिनव रिसर्च एवं डिजाइन को यूनाइटेड किंगडम (यूके) से पेटेंट प्राप्त हुआ है।

वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तूलिका मिश्रा के नेतृत्व में देश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम ने लगभग दो वर्षों तक इस पर शोध किया। इस दौरान करीब 50 औषधीय पौधों पर परीक्षण कर उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए गए, जिसके बाद इस तकनीक के लिए पेटेंट आवेदन किया गया।

यह तकनीक एआई आधारित एक उन्नत प्रणाली है, जो औषधीय पौधों में पाए जाने वाले जैव-सक्रिय यौगिकों की तेजी से पहचान कर उनकी सम्भावित औषधीय उपयोगिता का आंकलन करती है। इस नवाचार के माध्यम से अल्कलॉइड, स्टेरॉयड, फेनॉल और टैनिन जैसे महत्वपूर्ण तत्वों की पहचान बेहद कम समय में संभव हो सकेगी।

डॉ. तूलिका मिश्रा ने बताया कि यह एक डिजाइन पेटेंट है, जिसमें एआई तकनीक की मदद से पौधों के बायोएक्टिव केमिकल्स का विश्लेषण किया जा सकता है। यह शोध पारम्परिक वनस्पति ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में औषधीय अनुसंधान को नई दिशा देगा।

--पांचवां पेटेंट हासिल कर रचा कीर्तिमान

डॉ. तूलिका मिश्रा का यह पांचवां पेटेंट है, जिसमें एक कॉपीराइट भी शामिल है। इस शोध में डॉ. सीमा मंडल, डॉ. परशावेनी बालाराजू, राज्यलक्ष्मी मिश्रा, डॉ. सीमा नारखेडे, डॉ. थोडूर मनोहरन विजयलक्ष्मी एवं डॉ. रुचिका श्रीवास्तव सहित कई वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित यह नवाचार औषधीय अनुसंधान और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।

यह उपलब्धि गोरखपुर विश्वविद्यालय को वैश्विक शोध मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय