मुरादाबाद : जलभराव व तेंदुए की दहशत पर जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया सख्त
– नदी के बैक-फ्लो से 15 दिन का संकट
_ खाली प्लॉटों पर कचरा फेंकने वालों से वसूला जाएगा सफाई का हर्जाना
मुरादाबाद, 06 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में भारी बारिश के बाद उपजे हालात और ग्रामीण इलाकों में तेंदुए के आतंक को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया ने प्रशासनिक अमले के साथ मोर्चा संभाल लिया है। जिलाधिकारी ने महानगर के थाना सिविल लाइन स्थित दीनदयाल नगर स्थित रंगोली कॉलोनी, ऑफिसर्स कॉलोनी और साईं मंदिर रोड सहित विभिन्न इलाकों में मौके पर पहुंचकर जलभराव की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने नालों की सिल्ट सफाई, अवैध डक्ट व खिड़कियां बंद कराने और खाली प्लॉटों को कूड़ाघर बनाने वाले मालिकों पर कड़े जुर्माने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि गंगा, कोसी और रामगंगा के बैक-फ्लो से प्रभावित देहात क्षेत्र में बाढ़ शरणालय व मेडिकल कैंप सक्रिय कर दिए गए हैं। उधर, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम योजना के तहत संवेदनशील गांवों में 46 पिंजरे लगाने के साथ हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव और फ्लड लाइट की मदद से 24x7 निगरानी की जा रही है।
जलभराव पर तीन-स्तरीय कार्रवाई, खाली प्लॉट मालिकों पर लगेगा अर्थदंड
रंगोली कॉलोनी सहित शहर के अन्य जलभराव वाले क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने तीन-स्तरीय सख्त निर्देश जारी किए। सबसे पहले नालों की तत्काल तलीझाड़ सफाई कराई जाएगी। इसके साथ ही एमडीए के माध्यम से उन भवनों पर कार्रवाई तय की गई है जिन्होंने रंगोली कॉलोनी और ऑफिसर्स कॉलोनी की ओर अवैध रूप से खिड़कियां, दरवाजे और एसी खोल रखे हैं, जहां से सीधे नाले में कचरा फेंका जाता है। इसके अलावा तीन-चार ऐसे खाली प्लॉट चिह्नित किए गए हैं जिनका इस्तेमाल डंपयार्ड के रूप में किया जा रहा है। डीएम ने स्पष्ट किया कि प्लॉट पर सात-आठ फीट ऊंची दीवार और गेट लगाना भूखंड स्वामी का दायित्व है। ऐसा न करने पर नगर निगम खुद सफाई कराएगा और मस्टर रोल व सफाई में आने वाला पूरा खर्च अर्थदंड के रूप में प्लॉट मालिकों से ही वसूलेगा।
नदियों का बैक-फ्लो बढ़ा रहा संकट, 15 दिन तक विशेष निगरानी
गंगा नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ने के कारण कोसी और रामगंगा का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है, जिससे बैक-फ्लो की स्थिति बन गई है। अधिकारियों के मुताबिक यह असर अधिकतम 15 दिनों तक बना रह सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव होते ही बीडीओ, ग्राम प्रधान और सचिव के जरिए पंप लगाकर तत्काल पानी निकाला जा रहा है। बाढ़ शरणालय और मेडिकल कैंप सक्रिय कर दिए गए हैं, जहां स्थानीय विधायक, एसडीएम व प्रशासनिक टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।
जर्जर भवनों पर 09 सितंबर को अहम बैठक, 100 फीसदी सील की तैयारी
हाल ही में तीन तारीख की रात मिली सूचना पर नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम ने चार तारीख को त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अत्यंत जर्जर मकान को खाली कराकर सील किया था, जो अगले ही दिन ढह गया। इस सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत 09 तारीख को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें तकनीकी मूल्यांकन में चिह्नित शहर और देहात के शत-प्रतिशत जर्जर मकानों को सील करने और उनमें रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने की कार्ययोजना लागू की जाएगी।
तेंदुए के खौफ से निपटने को 46 पिंजरे, लगातार गश्त जारी
बलिया, मलकपुर सेमली और लालापुर पीपलसाना सहित तेंदुए से प्रभावित गांवों में पहले से मौजूद 16 पिंजरों के अलावा सीएसआर, जिला फंड व स्थानीय निकायों के सहयोग से कुल 46 पिंजरे लगाए जा चुके हैं। जंगल और आबादी के बॉर्डर पर हाई-मास्ट फ्लड लाइटें और तेंदुए को आबादी से दूर रखने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी ध्वनि तरंग उपकरण लगाए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

