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अंत्येष्टि स्थल के मेन गेट में दरार, प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

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गोरखपुर, 07 सितंबर (हि.स.)। राजघाट स्थित अंत्येष्टि स्थल पर आकाशीय बिजली गिरने से गुंबद का हिस्सा गिरने की घटना में दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद जिला प्रशासन ने जर्जर और अनुपयोगी भवनों को लेकर व्यापक स्तर पर सतर्कता शुरू कर दी है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल के मेन गेट में भी दरार आई है। प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद नगर निगम की ओर से सुरक्षा के दृष्टिगत दरार वाले गेट के पास सावधानी सूचक बोर्ड लगा दिया गया है, ताकि वहां आने-जाने वाले लोगों को संभावित खतरे के प्रति सचेत किया जा सके।

डीएम दीपक मीणा ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल पर हुई घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त मेन गेट की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। यदि निरीक्षण और स्थिति के अनुसार आवश्यक हुआ तो गेट को दोबारा बनवाने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर सावधानी बरतने के लिए सूचना बोर्ड लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि हालिया घटना से सबक लेते हुए प्रशासन की ओर से जिले में पुराने, जर्जर और अनुपयोगी सरकारी भवनों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नगर निगम द्वारा ऐसे करीब 200 भवनों को चिह्नित किया गया है, जिनके संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे भवनों को समय रहते चिन्हित कर सुरक्षित करना अथवा आवश्यकतानुसार ध्वस्त कराना है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।

डीएम ने कहा कि किसी भी जर्जर भवन को लेकर लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। विशेष रूप से ऐसे भवन जो लंबे समय से अनुपयोगी हैं या जिनकी संरचना कमजोर हो चुकी है, उनकी स्थिति का परीक्षण कराया जाना जरूरी है। यदि कोई भवन आमजन के लिए खतरा बन रहा है तो उसके संबंध में नियमानुसार तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

जिलाधिकारी ने बताया कि नगर निगम के साथ-साथ नगर पंचायत क्षेत्रों में भी इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है। सभी नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों (ईओ) को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर और अनुपयोगी भवनों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। ईओ को निर्देशित किया गया है कि अपने क्षेत्र में ऐसे भवनों का निरीक्षण कर सूची तैयार करें और भवन की स्थिति के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।

प्रशासन की ओर से नगर पंचायतों के ईओ को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे भवनों की पहचान करें, जिनसे आम लोगों को किसी प्रकार का खतरा हो सकता है। खासकर बाजार, सार्वजनिक स्थलों, आबादी वाले क्षेत्रों और लोगों की आवाजाही वाले स्थानों पर स्थित पुराने एवं कमजोर भवनों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भवनों को केवल चिह्नित करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि उनकी वास्तविक स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। जिन भवनों को ध्वस्त किया जाना आवश्यक है, उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जहां तत्काल ध्वस्तीकरण संभव न हो, वहां सुरक्षा के अन्य आवश्यक उपाय किए जाएं, ताकि किसी व्यक्ति के साथ दुर्घटना न हो।

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी जर्जर या अनुपयोगी भवन से जनहानि की संभावना नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से नगर निगम और नगर पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय