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रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु

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रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु


औरैया, 21 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में अजीतमल कस्बा क्षेत्र के ग्राम सुदनीपुर स्थित गमा देवी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य लोकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम भक्तों की मार्मिक कथाओं का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं रुक्मिणी-कृष्ण विवाह तथा सुदामा चरित की सजीव झांकियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

कथा के सातवें दिन ग्वालियर, मध्यप्रदेश से पधारे आचार्य लोकेश शास्त्री ने रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे होते हैं और सच्चे भक्तों के वश में रहते हैं।

आचार्य ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के परम सखा सुदामा अत्यंत निर्धन होने के बावजूद कभी किसी से कुछ नहीं मांगते थे। वे निस्वार्थ भाव से भगवान का स्मरण करते रहते थे। कथा में उन्होंने प्रसंग सुनाया कि एक बार भगवान कृष्ण अत्यंत व्यथित थे। जब रुक्मिणी ने कारण पूछा तो भगवान ने बताया कि उनके परम मित्र सुदामा के घर कई दिनों से चूल्हा नहीं जला है, लेकिन वह इतने स्वाभिमानी हैं कि कभी कुछ मांगते भी नहीं।

आचार्य ने बताया कि गुरु संदीपनि के आश्रम में अध्ययन के दौरान कृष्ण और सुदामा की गहरी मित्रता हुई थी। एक प्रसंग में उन्होंने कहा कि ठंड लगने पर भगवान कृष्ण ने अपना पीताम्बर सुदामा को ओढ़ा दिया था और बाद में प्रेमवश वही उन्हें भेंट कर दिया। सुदामा जब भी अपने मित्र को याद करते थे, उस पीताम्बर को देखकर भावुक हो उठते थे।

कथा के दौरान आचार्य ने चने वाली कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि एक वृद्धा के श्राप के कारण सुदामा ने स्वयं चने खा लिए थे ताकि उनके मित्र कृष्ण पर विपत्ति न आए। इसी त्याग और मित्रता के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने अंततः सुदामा का जीवन सुख-समृद्धि से भर दिया। सुदामा और कृष्ण की मित्रता की कथा सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल भक्ति भाव में डूब गया।

कार्यक्रम में आयोजक उदयवीर सिंह, राशू चौहान, बलवीर सिंह, जयवीर सिंह, धनवीर, यदुराम सिंह, शैलू, विनय तिवारी, गोपाल, रवि सेंगर, ओमजी सहित क्षेत्र के युवाओं एवं ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार