शुगर की वजह से आंख का पर्दा खराब हो जाता है : डॉ. रोहन कपूर
मुरादाबाद, 22 फरवरी (हि.स.)। सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान में रविवार को डायबीटिक रेटिनोपैथी की मास्टर क्लास कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। डॉ. रोहन कपूर ने लेजर की तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शुगर की वजह से आंख का पर्दा खराब हो जाता है अथवा उसमें सूजन आ जाती है। जिसके लिए लेजर प्रक्रिया के माध्यम से आंख में लेंस लगाकर लेजर के माध्यम से पर्दे में हुए छेद एवं अन्य बीमारी का उपचार किया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की वाइस चेयरपर्सन डॉक्टर आशी खुराना एवं ग्लूकोमा नेत्र चिकित्सा डॉ. मुकेश ने दीप प्रज्वलन करके किया। सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की ट्रस्टी शिखा गुप्ता ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस डायबीटिक रेटिनोपैथी के क्षेत्र में सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की द्वारा किया गया पहला प्रयास है, जिसमें नेत्र चिकित्सकों एवं पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों को डायबीटिक रेटिनोपैथी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जानकारी दी गई।
कॉन्फ्रेंस में डॉ. रवनीत कौर ने डायबीटिक रेटिनोपैथी क्या है और इसे समझने के लिए इसके लक्षणों के ऊपर चर्चा की। डॉ. इशा आचार्य के द्वारा डायबीटिक रेटिनोपैथी में होने वाली जांचों तथा उन जांचों को मॉनिटर करने की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. रूहीन सिद्दीकी ने आंख में लगाए जाने वाले आईवी इंजेक्शन और डायबिटिक ट्रैक टॉमी सर्जरी के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि जनसाधारण को यह सोचकर घबराहट होती है की आंख में इंजेक्शन बहुत ही पेनफुल प्रक्रिया है। परंतु यह सेफ होने के साथ-साथ एक आसान प्रक्रिया भी हैं। जिसके माध्यम से आंख के पर्दे पर बढ़ रही सूजन को रोका जा सकता है यदि हम प्रारंभिक स्तर पर डायबीटिक रेटिनोपैथी को पकड़कर आईवी इंजेक्शन के माध्यम से उसका उपचार शुरू करें तो इस बीमारी से लड़ना आसान है।
लोकेश चौहान ने सी एल गुप्ता नेत्र संस्थान के टेली मेडिसिन के मॉड्यूल को विस्तार में बताते हुए कहा कि डायबीटिक रेटिनोपैथी को कम्युनिटी में ढूंढ कर, उसके उपचार के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। संस्थान के फेलो डॉ. हिमांशु, डॉ. अंजु, डॉ. सिदरा आदि ने केस स्टोरी के माध्यम से डायबीटिक रेटिनोपैथी को आसानी से समझाने में अपनी भूमिका निभाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

