home page

राम वनवास का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, नम हुईं आंखें

 | 
राम वनवास का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, नम हुईं आंखें


बाराबंकी, 02 नवंबर (हि.स.)।, बाराबंकी के रामनगर की पुरानी तहसील परिसर में चल रही श्रीराम कथा में कथा व्यास परम पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। पिता के वचन और रघुकुल की मर्यादा की रक्षा के लिए राजपाट त्यागकर वन जाने की कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने सुखों का त्याग कर परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दी। राजा दशरथ द्वारा श्रीराम को राजगद्दी सौंपने की तैयारी और बाद में कैकेयी के वरदान के कारण वनवास का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि शुभ कार्यों को कभी टालना नहीं चाहिए। मनुष्य को हर परिस्थिति में प्रसन्न और धैर्यवान रहना चाहिए।

उन्होंने माता कौशल्या के त्याग, लक्ष्मण के भाई के प्रति समर्पण और माता सीता के पतिव्रत धर्म का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम के वनवास में तीनों का त्याग और आदर्श जीवन के लिए प्रेरणास्रोत हैं। माता कैकेयी की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रामकथा में प्रत्येक पात्र का अपना विशेष महत्व है। वनवास की कथा हमें अपने धर्म, वचन और कर्तव्यों के पालन की सीख देती है।

इस दौरान व्यापार मंडल अध्यक्ष रविकांत पांडेय, पवन ओझा, गौरीकांत दीक्षित, निखिल, पूरन, श्रवण पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी