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खेत तालाबों में तैयार हो रहे डिजाइनर पर्ल, मत्स्य पालन से भी बढ़ रही किसानों की आय : जिलाधिकारी

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खेत तालाबों में तैयार हो रहे डिजाइनर पर्ल, मत्स्य पालन से भी बढ़ रही किसानों की आय : जिलाधिकारी


कानपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। खेत तालाब जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। इन्हें मत्स्य पालन, मोती की खेती और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अधिक से अधिक किसानों तक यह मॉडल पहुंचाया जाएगा। यह बातें रविवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं।

बिधनू विकासखंड के ग्राम सम्भुआ में खेत तालाब का उपयोग अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं है। यहां एक किसान ने खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन को जोड़कर आय बढ़ाने का अभिनव मॉडल विकसित किया है। परियोजना में करीब 30 हजार सीपियों से मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें विशेष मोल्ड तकनीक के जरिए स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों सहित विभिन्न आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल भी विकसित किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भूमि संरक्षण अनुभाग ने ग्राम सम्भुआ निवासी रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा खेत तालाब बनवाया। योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत, अधिकतम 52,500 रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से मिला। कृषि विभाग और मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने तालाब में मोती उत्पादन शुरू किया।

करीब 18 से 20 लाख रुपये लागत वाली इस परियोजना में प्रत्येक सीपी से दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। परियोजना के लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं और करीब 18 माह में मोती पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। तैयार होने वाले मोतियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 50 लाख रुपये बताया गया है।

परियोजना की खासियत यह है कि चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ती हैं। इसी प्रक्रिया से विभिन्न धार्मिक और कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार हो रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में इनकी बाजार में अधिक मांग होने से बेहतर कीमत मिलने की संभावना है।

रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन भी किया जा रहा है। अब तक तीन बार मछली उत्पादन हो चुका है और इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग आय बढ़ाने वाली गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने भूमि संरक्षण अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों को भी मत्स्य पालन, मोती की खेती और अन्य बहुउद्देशीय गतिविधियों से जोड़कर इस मॉडल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने भूजल सप्ताह के तहत पौधरोपण कर जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया तथा सभी खेत तालाबों की साफ-सफाई और उनके आसपास वृक्षारोपण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर उप कृषि निदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर.एस. वर्मा, जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह तथा अन्य अधिकारियों ने किसानों को उन्नतशील ज्वार और साँवा की मिनीकिट भी वितरित की।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप