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भगवान की शरणागति ही जीव का वास्तविक घर, गोसेवा से श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव : स्वामी राजेंद्रदास

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भगवान की शरणागति ही जीव का वास्तविक घर, गोसेवा से श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव : स्वामी राजेंद्रदास


भगवान की शरणागति ही जीव का वास्तविक घर, गोसेवा से श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव : स्वामी राजेंद्रदास


गोरखपुर, 27 सितंबर (हि.स.)। युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास वृंदावन से पधारे मलूक पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने प्रतिदिन के नियम के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास कृत गीतावली के पद का गान किया। इसके बाद उन्होंने लव-कुश के नामकरण संस्कार और गुरुकुल शिक्षा का वर्णन किया।

कथा व्यास ने कहा कि कुलीनता जीवन का सद्गुण है। अच्छे माता-पिता और कुलीन वंश में ही महापुरुष पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए विवाह और पारिवारिक संस्कारों की परंपराओं को महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिंडदान आदि श्रद्धा की प्रक्रियाओं का भी अपना धार्मिक महत्व है।

उन्होंने कहा कि गुलामी के समय क्रांति का बीज गोरक्षा था, लेकिन आजादी के 80 वर्ष बाद भी भारत गोवध से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। जीवन में गुरु-कृपा का विशेष महत्व है। सच्चे गुरु की पूर्ण कृपा मिलने पर शिष्य का कल्याण सुनिश्चित होता है।

उन्होंने कहा कि ब्रज मंडल में भगवान के आगमन के बाद वहां लक्ष्मी का नित्य निवास होने लगा। गोपियां कहती हैं कि ब्रज बैकुंठ से भी अधिक सुंदर हो गया। भगवान की लीला में भक्तों को विस्मित या शंकित होने के बजाय पूर्ण विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं। धर्मनिष्ठ और सदाचारी संतों का दर्शन मात्र भी जीव के कल्याण का कारण बनता है।

कथा व्यास ने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां आने पर व्याकुल होने के बजाय धैर्य रखना चाहिए। भगवान के प्रति विश्वास की कमी के कारण मनुष्य परेशान रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरणागति ही हमारा लक्ष्य है। सभी जीवों का वास्तविक घर भगवान की शरणागति है। जब तक यह प्राप्त नहीं होती, तब तक जीवन का प्रवास जारी रहता है।

गोसेवा से श्रीकृष्ण की प्राप्ति

स्वामी राजेंद्रदास ने कहा कि गोविंदा की शरणागति करने का सामर्थ्य गौ माता में है। गोसेवा करने पर उनकी कृपा से भगवान का साक्षात दर्शन हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण भी गोसेवा की कामना से ब्रज में आए और प्रत्यक्ष गोसेवा का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि हम श्रीकृष्ण को पाना चाहते हैं और श्रीकृष्ण गाय को पाना चाहते हैं। इसलिए गाय की सेवा करने से श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव है। गाय को पशु नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोमाता का गोबर भी सामान्य पदार्थ नहीं, बल्कि कल्याणकारी और पवित्र है।

रासलीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी योगमाया के प्रभाव से अनंत गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। जितनी गोपियां हैं, उतने ही कृष्ण हैं।

उन्होंने कहा कि जिन गोरक्षनाथ की तपस्थली में कथा हो रही है, वहां भगवान गोरखनाथ भी गोमाता के गोबर से प्रकट होने की मान्यता है। गोबर को उन्होंने अत्यंत पवित्र बताते हुए कहा कि गाय कभी किसी का उधार नहीं रखती और गोसेवा का फल प्रत्यक्ष मिलता है।

भगवान ही हमारे रक्षक और शरण

कथा व्यास ने कहा कि भगवान ही हमारे रक्षक हैं और भगवान ही हमारी शरण हैं। उनके भजन और कथा-श्रवण से जीवन भयमुक्त और सुखमय होता है। वह जिसे अपना बना लेते हैं, उसका कल्याण किए बिना नहीं छोड़ते। पूतना राक्षसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने उसे भी दूध पीने के लिए पकड़ा और उसका कल्याण किया।

उन्होंने कहा कि हमारा शरीर और संसार हमारा नहीं है। हमारे अपने केवल भगवान हैं। हम भगवान को भूल सकते हैं, लेकिन भगवान हमें कभी नहीं भूलते। इसी अनुभूति के अभाव में मनुष्य दुखी रहता है। जिस प्रकार जल में रहकर भी मछली प्यासी रहती है, उसी प्रकार भगवान के भरोसे रहकर भी मनुष्य उन्हें जान नहीं पाता। उन्होंने ‘धोबिया जल बीच रहत पियासा’ भजन गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इस अवसर पर योगी कमलनाथ, महंत रविंद्रदास, सांसद रवि किशन, भाजपा क्षेत्रीय महामंत्री राहुल श्रीवास्तव और अजय सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ। संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय