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विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए आज वट वृक्ष के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है : रमेश

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विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए आज वट वृक्ष के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है : रमेश


विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए आज वट वृक्ष के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है : रमेश


विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए आज वट वृक्ष के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है : रमेश


विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए आज वट वृक्ष के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है : रमेश


-विजयादशमी उत्सव पर आरएसएस का पथ संचलन, राष्ट्र निर्माण में संगठित समाज की भूमिका पर जोर

देवरिया, 19 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, देवरिया नगर के तत्वावधान में सोमवार को विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ देवरिया क्लब से हुआ। इस अवसर पर गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राहुल पोद्दार ने की। उत्सव में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लेकर अनुशासन, संगठनात्मक एकजुटता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता रमेश ने विजयादशमी उत्सव के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका, संगठनात्मक अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, सेवा भाव और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है। उनके अनुसार, संगठित समाज ही देश की प्रगति और राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि विराट हिंदू राष्ट्र के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वटवृक्ष के समान खड़ा है। भारत को परम वैभव तक पहुंचाने का एकमात्र आधार संगठित हिंदू समाज है।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में अपनी सांस्कृतिक पहचान और हिंदुत्व के प्रति गौरव का भाव जागृत हुआ है। समाज को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों के प्रति जागरूक रहकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानना सनातन विचार की विशेषता है। यह विचार समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। मुख्य वक्ता ने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राम और कृष्ण की धरती है। उन्होंने शबरी के प्रसंग के माध्यम से सनातन संस्कृति में समरसता, प्रेम और सम्मान के महत्व को समझाया।

उन्होंने विजयादशमी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और रावण के बीच संघर्ष को केवल एक स्त्री के अपहरण की घटना तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारत के सम्मान और स्वाभिमान से भी जुड़ा विषय था। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म की विजय, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे सामाजिक जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण के मूल्यों को अपनाएं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। सामाजिक एकता और परस्पर सहयोग से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समरसता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में विभाग प्रचारक दीपक, जिला प्रचारक आकाश, नगर प्रचारक राहुल, जिला कार्यवाह कृष्णप्रताप, जिला बौद्धिक प्रमुख राजेश, जिला शारीरिक प्रमुख उपेंद्र, नितेश, नगर कार्यवाह मुकुंद, अनुपम, अमित, जिला संघचालक मकसूदन, विभाग संघचालक राजधारी, अजय, रामबरन, राजेश, विशाल, मोहन, भानु, दिवाकर, नीरज, महेश्वर, दीपेंद्र, आदित्य विक्रम, शिवम, विनय, साकेत, राधारमण, अभय नाथ, अभय मणि, सत्यप्रकाश, शलभ, ज्ञान, त्रिलोक और अम्बुज , सुरेश , रोशन राजेश सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक