ओबीसी महिलाओं का प्रतिनिधित्व रोकना लोकतंत्र की हत्या : करिश्मा ठाकुर
कानपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी महिलाओं को उनका अधिकार देने से रोका जा रहा है। सरकार जानबूझकर जातीय जनगणना को आधार बनाकर देरी कर रही है। करीब 60 प्रतिशत ओबीसी महिलाओं को प्रतिनिधित्व से वंचित रखना लोकतंत्र की हत्या है। हमारी माताओं-बहनों को भी संसद में बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। यह लड़ाई उनके हक और सम्मान की है। यह बातें शुक्रवार को उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष करिश्मा ठाकुर ने कही।
कचहरी स्थित न्यू लायर्स चैंबर में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा करिश्मा ठाकुर ने भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण बिल के जरिए ओबीसी महिलाओं को दरकिनार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अनुच्छेद 334(ए) में संशोधन का हवाला देकर यह कह रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में वर्षों लगेंगे, जबकि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में छह महीने से भी कम समय में व्यापक जाति सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य ओबीसी महिलाओं को लोकसभा में प्रतिनिधित्व से वंचित रखना है। उन्होंने कहा कि कुछ ही हफ्तों में जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आ सकते हैं, जिसके बाद ओबीसी महिलाओं को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। करिश्मा ठाकुर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगरपालिकाओं में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आज लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
प्रेस वार्ता में मोना पासवान, ममता शाक्य, ममता परिहार, निहारिका सिंह, अधिवक्ता प्रियंका वक्त और विधिमा राजपूत सहित कई महिला अधिवक्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

