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भारतीय कला की विविधता और वैश्विक संवाद पर मंथन : सुहास बहुलकर

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भारतीय कला की विविधता और वैश्विक संवाद पर मंथन : सुहास बहुलकर


कानपुर, 28 फरवरी (हि.स.)। भारतीय कला केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि उसकी विविधता और सतत परम्परा आज भी कलाकारों को नई सृजनात्मक दिशा देती है और वैश्विक मंच पर भारतीय कला का संवाद लगातार सशक्त हो रहा है। यह बातें शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइन आर्ट्स में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘भारतीय कला में विविधता, निरंतरता और वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध चित्रकार सुहास बहुलकर ने कही।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश से आए कला विशेषज्ञों ने भारतीय कला की प्राचीनता, विविधता और उसकी सतत परंपरा पर विचार साझा किए। मुख्य अतिथि सुहास बहुलकर ने ‘चित्रकूट में राम दर्शन’ को कलाकारों के लिए प्रेरणा का केंद्र बताते हुए वहां से सृजनात्मक ऊर्जा लेने का आह्वान किया और लाइव पेंटिंग के जरिए कला का प्रदर्शन भी किया।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय से पधारे डॉ. जयशंकर मिश्रा ने भारतीय लोक कलाओं को सांस्कृतिक चेतना का आधार बताया और कहा कि लोक कलाओं का पुनरुत्थान आधुनिकता के साथ जोड़कर निरंतर किया जाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. चांदनी सक्सेना एवं इंजीनियर नीरज पाठक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि ऑनलाइन व ऑफलाइन 10 सत्रों में लगभग 170 प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के आयोजन में आयोजन समिति के सदस्य प्रो. सुभम शिवा, सहायक प्रोफेसर तनीषा वधावन, जेबी यादव, डॉ. राज कुमार सिंह, डॉ. बप्पा माजी, विनय सिंह, डॉ. रणधीर सिंह, प्रिया मिश्रा, प्रियांशी, कीर्ति वर्मा सहित अन्य विद्यार्थियों के विशेष सहयोग से आयोजन सफल हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप