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लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए बहू-बेटी सम्मेलन पहल हाेगी प्रभावी : एडीजी

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लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए बहू-बेटी सम्मेलन पहल हाेगी प्रभावी : एडीजी


गोरखपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध एवं लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के उद्देश्य से गोरखपुर जोन में संचालित बहू-बेटी सम्मेलन पहल काे प्रभावी बनाने के लिए शुक्रवार को गोरखपुर में स्थित एनेक्सी भवन में एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इस दाैरान एडीजी मुथा अशोक जैन ने महिलाओं एवं बच्चों पर हो रहे अपराध को नियंत्रण करने के लिए लोगों को जागरूक करते हुए अपने अनुभव भी साझा किये।

मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन ने यूनिसेफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण पहल के लिए यूनिसेफ का विशेष धन्यवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ सामाजिक सरोकारों के साथ विशेष रूप से बच्चों के विकास, संरक्षण तथा उनके अधिकारों के संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर जोन सामाजिक दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है, जहाँ महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, शोषण तथा अन्य अनेक समस्याएँ निरंतर सामने आती रहती हैं। विशेष रूप से यह क्षेत्र अपेक्षाकृत पिछड़ा होने तथा बड़ी संख्या में पुरुषों के रोजगार के लिए घर से बाहर रहने के कारण महिलाओं का लंबे समय तक घर और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अकेले रहना, कई सामाजिक एवं सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को और जटिल बना देता है। ऐसे क्षेत्र में यूनिसेफ का तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी कार्यक्रम की सफलता के लिए सटीक आँकड़ों की उपलब्धता और उनका समुचित विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में यूनिसेफ द्वारा डेटा आधारित विश्लेषण और तकनीकी सहयोग अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। उन्होंने मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत किए गए सराहनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी अधिकारियों द्वारा निरंतर प्रभावी प्रयास किए गए हैं। विशेष रूप से थानों में मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के माध्यम से महिला सुरक्षा, सहायता एवं परामर्श संबंधी कार्यों को सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन थाना स्तरीय मिशन शक्ति केंद्रों को काउंसलिंग सेंटर एवं महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में भी गंभीरता से कार्य किया जाना चाहिए।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि जब भी रिसोर्स पर्सन किसी विषय पर आँकड़े या जानकारी प्रस्तुत करें, तो अधिकारीगण अपने फील्ड अनुभवों के आधार पर उस पर सार्थक चर्चा करें, तर्क रखें, सुझाव दें तथा अपना फीडबैक अवश्य साझा करें। उन्होंने कहा कि आज इस जनपद में आयोजित कार्यशाला के उपरांत आगामी तीन अन्य जनपदों में भी इसी प्रकार की कार्यशालाएँ आयोजित की जानी हैं, इसलिए आप सभी का फीडबैक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होगा।

इसी कड़ी में गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने अपने संबोधन में कहा कि हमें बातचीत के दौरान तथा अपने कार्य निष्पादन के समय महिलाओं से संबंधित विषयों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जेंडर संबंधी विमर्श को केवल सेनेटरी पैड और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े अनेक गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। पुलिस विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग में कार्यरत महिला कार्मिकों की आवश्यकताओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

इसी संबंध में गोरखपुर के एसपी सिटी निमिष पाटिल ने कहा कि इस कार्यशाला के बाद निश्चित रूप से अन्य विभाग से आवश्यक सहयोग मिलेगा और कार्यक्रम सफल होगा।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) दिनेश पुरी एवं पुलिस अधीक्षक (अपराध) सुधीर जायसवाल भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम में जनपद गोरखपुर के समस्त सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, समस्त पुलिस थानों से मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी एवं मिशन शक्ति केंद्र से दो-दो महिला पुलिस कार्मिक, विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, पी०जी०एस०एस० की टीम तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय