आईआईटी कानपुर में 312 टीमों को पछाड़ सीएसजेएमयू ने जीता प्रथम पुरस्कार : प्रियम मिश्रा
कानपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को तकनीक के माध्यम से दूर किया जा सकता है। स्थानीय दवा दुकानों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आभासी चिकित्सालय के रूप में विकसित कर लोगों को पंजीकृत चिकित्सकों से जोड़ने की पहल की गई है। इससे दूरदराज के मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह अभिनव मॉडल शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के अंतराग्नि महोत्सव में आयोजित युवा स्पार्क प्रतियोगिता में सीएसजेएमयू की टीम ने प्रस्तुत किया।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान की टीम ‘अनफिल्टर्ड इंजीनियर्स’ ने प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। देशभर की 312 टीमों के बीच हुई प्रतिस्पर्धा में टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। प्रतियोगिता में चयनित 10 टीमों को अंतिम चरण में अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला था।
टीम प्रमुख प्रियम मिश्रा और सदस्य स्तुति गुप्ता ने निर्णायक मंडल के सामने ‘दवा दुकानों और वंचित क्षेत्रों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आभासी चिकित्सालय’ का मॉडल प्रस्तुत किया। इसके तहत गांवों और दूरदराज के इलाकों में दवा दुकानों तथा छोटे चिकित्सालयों को आभासी चिकित्सालय के रूप में विकसित करने की योजना है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता तैयार करेगी मरीज की रिपोर्ट
मॉडल के अनुसार, दवा दुकान पर मौजूद प्रशिक्षित कर्मचारी मरीज के लक्षण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मोबाइल फोन के माध्यम से दर्ज करेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता इन जानकारियों का विश्लेषण कर कुछ ही मिनटों में मरीज की समस्या का संक्षिप्त विवरण तैयार करेगी। इसके बाद पंजीकृत चिकित्सक रिपोर्ट की समीक्षा कर वीडियो कॉल के जरिए मरीज को परामर्श देंगे। उपचार का निर्णय चिकित्सक ही करेंगे।
अस्पताल पहुंचने तक होगी निगरानी
यदि मरीज को अस्पताल में भर्ती या अन्य उपचार की जरूरत होती है तो उसे नजदीकी उपयुक्त अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी इस मॉडल में शामिल है। मरीज के अस्पताल पहुंचने तक उसे अस्पताल भेजने की प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।
प्रतियोगिता का आयोजन आईआईटी कानपुर के स्टूडेंट चैप्टर ने प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के सहयोग से किया। प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि 50 हजार रुपये थी। विश्वविद्यालय के छात्रों की इस उपलब्धि को तकनीक के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

