मुख्यमंत्री के 'प्राकृतिक खेती' संकल्प को जमीन पर उतारती दिख रही सीएसए की किसान प्रदर्शनी
कानपुर, 18 जून (हि.स.)। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर में गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की मौजूदगी में प्राकृतिक खेती को लेकर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मुख्य आयोजन के साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर में एक भव्य किसान प्रदर्शनी लगाई गई, जहां मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने खुद स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां रखी तकनीकों का जायजा लिया। प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों ने भी बढ़चढ़कर जानकारी हासिल की।
प्रदर्शनी में लगे अधिकांश स्टॉल प्राकृतिक और जैविक खेती की थीम पर आधारित थे। किसानों को रसायन मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लागत कम करने के उपाय बताए गए। रमईपुर से आए किसान जय नारायण सिंह ने बताया कि उन्हें प्राकृतिक खेती की नई तकनीकों की जानकारी मिली है, जिनका उपयोग कर वे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के साथ रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। वहीं बिल्हौर के किसान मंगल सिंह कटियार ने बताया कि स्टॉलों पर प्राकृतिक कीटनाशक और जीवामृत तैयार करने की विधि सिखाई गई।
कृभको के स्टॉल पर किसानों को तरल जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम, एज़ोटोबैक्टर और पीएसबी की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इनका उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाने में सहायक है। साथ ही नीम लेपित यूरिया और प्राकृतिक पोटाश के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे खेती की लागत कम हो सकती है।
पशुपालन विभाग के स्टॉल पर किसानों को मुर्गी पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीके बताए गए। विशेषज्ञों ने बेहतर नस्लों, उनके रखरखाव और बीमारियों से बचाव संबंधी जानकारी साझा की। अधिकारियों ने कहा कि छोटे स्तर पर भी मुर्गीपालन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आईपीएल बाॅयोलॉजिकल्स के स्टॉल पर मिट्टी की सेहत सुधारने वाले जैविक उत्पादों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन उत्पादों का उपयोग खेत की मिट्टी के पीएच स्तर को संतुलित करने और फसलों की जड़ों को मजबूत बनाने में सहायक होता है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
नमामि गंगे परंपरागत कृषि विकास योजना के स्टॉल पर किसानों को प्राकृतिक खेती संबंधी मार्गदर्शिका वितरित की गई। यहां गोबर और गौमूत्र आधारित खेती के तरीकों की जानकारी दी गई। वहीं उद्यान विभाग के स्टॉल पर लहसुन की उन्नत खेती को लेकर किसानों को प्रशिक्षित किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कम लागत और कम पानी में लहसुन की खेती किसानों को अच्छा लाभ दे सकती है।
प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर खेती की नई तकनीकों, जैविक उत्पादों और आय बढ़ाने के वैकल्पिक साधनों की जानकारी प्राप्त की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

