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आईपीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने दिए उत्कृष्ट पुलिसिंग के गुरुमंत्र

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आईपीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने दिए उत्कृष्ट पुलिसिंग के गुरुमंत्र


आईपीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने दिए उत्कृष्ट पुलिसिंग के गुरुमंत्र


- संवेदनशीलता, सत्यनिष्ठा और जनविश्वास ही सफल पुलिस अधिकारी की असली पहचान

— भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और साइबर अपराध से निपटने के अनुभव किए साझा

वाराणसी, 04 अगस्त (हि.स.)। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट वाराणसी में मंगलवार को आईपीएस 78 आरआर प्रोबेशनर्स-2025 बैच के 21 प्रशिक्षु अधिकारियों (17 पुरुष एवं चार महिला) को उत्कृष्ट पुलिसिंग, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के मूल मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि सेवा जीवन का स्वर्णिम काल होती है, क्योंकि इसी दौरान आत्मबल, साहस, अनुशासन, संवेदनशीलता और ज्ञान की मजबूत नींव पड़ती है, जो एक आदर्श पुलिस अधिकारी के व्यक्तित्व का निर्माण करती है।

संवाद के दौरान पुलिस आयुक्त ने प्रशिक्षु अधिकारियों को कमिश्नरेट वाराणसी की कार्यप्रणाली, आधुनिक पुलिसिंग मॉडल, नेतृत्व क्षमता, जनसेवा तथा कानून-व्यवस्था के प्रभावी प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। अपने प्रशासनिक एवं फील्ड अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी की पहचान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी संवेदनशीलता, निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और जनता का विश्वास अर्जित करने की क्षमता ही उसे उत्कृष्ट बनाती है।

उन्होंने कमिश्नरेट की प्रशासनिक संरचना और आधुनिक पुलिसिंग व्यवस्था की जानकारी देते हुए यातायात प्रबंधन, डायल-112, जल पुलिस, पर्यटक पुलिस, तकनीकी रूप से सशक्त एसओजी एवं सर्विलांस टीम, ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन प्रणाली, अत्याधुनिक सीसीटीवी कंट्रोल रूम तथा वीवीआईपी सुरक्षा प्रबंधन की कार्यशैली पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रशिक्षु अधिकारियों ने सावन, देव दीपावली और महाकुम्भ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में प्रभावी भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और सुगम दर्शन व्यवस्था से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली। इस पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि धार्मिक नगरी काशी की संवेदनशीलता को देखते हुए श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सतर्क, संवेदनशील और मानवीय पुलिसिंग सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बदलते साइबर अपराधों और तकनीकी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक पुलिस अधिकारी को तकनीकी रूप से दक्ष होना होगा। नवाचार को अपनाते हुए अपराधियों से एक कदम आगे सोचने और कार्य करने की क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाने, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा गुणवत्तापूर्ण विवेचना और सशक्त पैरवी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और सत्यनिष्ठा ही एक आदर्श पुलिस अधिकारी की वास्तविक पहचान हैं। अधिकारियों को निरंतर सीखने, स्वयं को परिष्कृत करने और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनने का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षु अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त से शिष्टाचार भेंट की। पुलिस आयुक्त ने उनके साथ सामूहिक भोजन किया तथा स्मृति-चिह्न भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अध्ययन भ्रमण और प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें सक्षम, संवेदनशील, निष्पक्ष और जनोन्मुख पुलिस अधिकारी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, पुलिस उपायुक्त काशी गौरव बंसवाल, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन प्रमोद कुमार, पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नीतू कादयान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी