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अर्धसत्य को बताकर भारत की छवि धूमिल करने की हो रही है कोशिश : सीएम योगी

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अर्धसत्य को बताकर भारत की छवि धूमिल करने की हो रही है कोशिश : सीएम योगी


नोएडा, 20 सितंबर (हि.स.)। नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में प्रेरणा शोध संस्थान द्वारा आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श 2026’ का समापन हुआ। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। 'नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान' पर केंद्रित इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर सीएम योगी ने ‘प्रेरणा विचार’ और ‘केशव संवाद’ पत्रिका के 2026-27 अंक का आधिकारिक विमोचन भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' के गायन के साथ देशभक्तिपूर्ण माहौल में हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सनातन चेतना ही उसकी वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं और भारत की परंपरा में भी सभी पूजा पद्धतियों के सम्मान की भावना रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की यही विशेषता उसे दुनिया में अलग पहचान देती है।

‘नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा ने दुनिया को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की भावना दी है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी विचारों पर रोक नहीं लगाई, बल्कि दुनिया के हर हिस्से से अच्छे विचारों को स्वीकार करने की परंपरा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी पूजा पद्धति पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया और सभी को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल भावना भी समानता और सभी के अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति कभी एकांगी नहीं रही। यहां अलग-अलग विचारों और परंपराओं के लिए स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि ‘सत्य एक है, उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की इसी सोच ने देश को विविधता के बावजूद एकता में बांधे रखा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्य, असत्य और अर्धसत्य में अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अर्धसत्य कभी सत्य नहीं हो सकता और कुछ लोग अर्धसत्य के माध्यम से भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों और युवाओं को किसी भी विषय को तथ्यों और संविधान की भावना के अनुरूप समझने की जरूरत है।सीएम योगी ने कहा कि भारत ने संकट के समय दुनिया के अलग-अलग समुदायों को शरण और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानवता और सभी के कल्याण की भावना रही है।

नारी सम्मान के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान सनातन है तो नारी शक्ति का सम्मान भी उसकी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से वर्तमान तक महिलाओं ने शिक्षा, शासन, संस्कृति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका साबित की है।उन्होंने अहिल्याबाई होलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने सुशासन के साथ सांस्कृतिक कार्यों को भी आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई और वीरांगना झलकारी बाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महिलाओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कल्पना चावला और पीटी ऊषा जैसी महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां महिलाओं ने अवसर मिलने पर नेतृत्व नहीं किया हो। उन्होंने समाज से भेदभाव की मानसिकता बदलने और महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर देने की अपील की।मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हर प्रकार के अत्याचार को रोकना समाज की जिम्मेदारी है। इसके लिए समाज को जागरूक करने के साथ जरूरत पड़ने पर कानून का सहारा भी लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संविधान और कानून सभी नागरिकों को सुरक्षा और अधिकार प्रदान करते हैं, इसलिए किसी भी तरह के भेदभाव या अत्याचार को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।सीएम योगी ने कहा कि युवाओं को जातिवाद में बांटने के बजाय उन्हें नेतृत्व करने के अवसर और उचित मंच उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब भी युवाओं को मौका मिला है, उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है।

उन्होंने किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्नदाता किसी भी जाति का हो सकता है, इसलिए उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। किसान को उचित बाजार और सम्मान मिलना चाहिए।मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान शुरू किए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व और सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में तीन नई पीएसी बटालियन का गठन किया गया है, जिनके भवन निर्माण का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें वीरांगना अवंतीबाई और वीरांगना झलकारी बाई के नाम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अवंतीबाई ने महज 27 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई थी और ऐसी वीरांगनाओं के योगदान को देश को याद रखना चाहिए।

सीएम योगी ने कहा कि ‘प्रेरणा विमर्श’ के माध्यम से समाज के ज्वलंत मुद्दों को उठाने और उन पर खुले मंच पर चर्चा करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच समाज के सामने मौजूद विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर देते हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘प्रेरणा विचार’ और ‘केशव संवाद’ पत्रिका के 2026-27 अंक का विमोचन भी किया। दो दिवसीय कार्यक्रम में युवा, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का केंद्र नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान और राष्ट्र निर्माण रहा।

इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय चेतना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के संकल्पों को पहचानता है, वही देश को सही दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

हमारी संस्कृति में 'स्व' का अर्थ अपने धर्म, संस्कारों और नैतिक मूल्यों को समझना है। जिस प्रकार मजबूत जड़ों वाला वृक्ष हर आंधी-तूफान में अडिग खड़ा रहता है, उसी प्रकार सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा समाज भी हर चुनौती का सामना कर सकता है।

स्वांत रंजन ने भारत के आर्थिक और शैक्षणिक इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत पूर्ण रूप से शिक्षित और आत्मनिर्भर था। एक समय दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 24 प्रतिशत था, जो अंग्रेजों के जाने के समय घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गया था।

उन्होंने कहा कि 1947 में देश को स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन जिस औपनिवेशिक तंत्र से पूरी तरह आजाद होना था, उससे मुक्ति की प्रक्रिया अभी भी जारी है। आज के युवाओं को भारत के वास्तविक इतिहास और सामर्थ्य को समझते हुए भविष्य के नए सपने गढ़ने की आवश्यकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी