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लाभार्थीपरक योजनाओं का सीडीओ ने लिया जायजा, योजनाओं का दायरा बढ़ाने के दिए निर्देश

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लाभार्थीपरक योजनाओं का सीडीओ ने लिया जायजा, योजनाओं का दायरा बढ़ाने के दिए निर्देश


कानपुर, 02 जुलाई (हि.स.)। सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों तक पहुंचाया जाए, ताकि उनकी आय बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। यह बातें गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव जे. जैन ने चौबेपुर विकासखंड में विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं के निरीक्षण के दौरान कहीं।

मुख्य विकास अधिकारी ने परियोजना निदेशक डीआरडीए आलोक कुमार सिंह, उप कृषि निदेशक डॉ. आर.एस. वर्मा तथा जिला उद्यान अधिकारी उमेश चंद्र उत्तम के साथ चौबेपुर क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं का जायजा लिया। उन्होंने फत्तेपुर गांव में किसान राजेंद्र चौरसिया के 1500 वर्गमीटर क्षेत्र में लगी पान की खेती का निरीक्षण किया और अन्य किसानों को भी इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए।

इसके बाद उन्होंने मंधना रोड स्थित शंकर कन्फेक्शनरी का दौरा किया। उद्यमी विनीत अग्निहोत्री द्वारा स्थापित इकाई में लॉलीपॉप, फ्रूट जेली, जैम और अन्य उत्पादों का प्रतिदिन लगभग एक टन उत्पादन किया जा रहा है। अधिकारियों ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत मिल रहे अनुदान और उत्पादन व्यवस्था की जानकारी ली।

सीडीओ ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत ग्राम सादीपुर में तनवीर की बेकरी यूनिट का भी जायजा लिया। उन्होंने जिला रिसोर्स पर्सन और जिला उद्यान अधिकारी को निर्देश दिए कि पात्र उद्यमियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

निरीक्षण के दौरान ब्रह्मावर्त नेचर फार्मिंग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और चौबेपुर मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। फार्म मशीनरी बैंक, सोलर सिस्टम, उर्वरक वितरण, मसाला पैकेजिंग, डेयरी और कृषि यंत्रों के संचालन की जानकारी लेने के साथ स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऐसे मॉडल अपनाकर स्वरोजगार बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी ने उदैतपुर में मल्टीलेयर फार्मिंग के तहत कुंदरू की खेती का निरीक्षण किया तथा अन्य किसानों को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा पशुपालन, दुग्ध संग्रह, आचार, मुरब्बा, पापड़, आटा मिल, बेसन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के संचालन की भी जानकारी ली। जिन समूहों ने वित्तीय सहायता की आवश्यकता बताई, उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से जोड़ने के लिए जिला उद्यान अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप