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कौशल विकास पाठ्यक्रमों से ही भारत 2047 तक होगा विकसित राष्ट्र : प्रो. अशोक गाबा

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कौशल विकास पाठ्यक्रमों से ही भारत 2047 तक होगा विकसित राष्ट्र : प्रो. अशोक गाबा


--आज का युग कौशल का युग: प्रो0 सत्यकाम

--मुक्त विश्वविद्यालय में क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन

प्रयागराज, 04 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कौशल विकास के द्वारा कुशल मानव संसाधनों को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगारोन्मुख बनाया जा सकता है। यह बातें मुख्य अतिथि राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के कार्यपालक सदस्य प्रोफेसर अशोक गाबा ने कही।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में शनिवार को इम्प्लीमेंटिंग ग्रेजुएट एम्पलायबिलिटी एण्ड नेशनल स्किल्स क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो0 गाबा ने कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से ही विकसित भारत 2047 बनाने के रोडमप को विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के सभी 17 मुक्त विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा सकते हैं। कौशल विकास संबंधी किसी भी कोर्स को बनाए जाने से पूर्व स्थानीय तथा क्षेत्रीय औद्योगिक प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करके ही इस प्रकार के कोर्सों का निर्माण किया जाना चाहिए। जिससे युवकों को कौशल विकास की दिशा में अग्रसर करते हुए शत प्रतिशत रोजगार प्रदान करने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा सके। इस अवसर पर उन्होंने भारत के प्रमुख स्टार्टअप की भी चर्चा की।

समारोह के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के मुख्य सलाहकार अमित शर्मा ने राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद के गठन, महत्व तथा कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय अवॉर्डिंग और एसेसिंग बॉडी की मान्यता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा समय की मांग अनुसार कौशल विकास को प्रत्येक पाठ्यक्रम में समाहित करते हुए प्रेरणादाई बनाने पर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि एनसीवीईटी भारत में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा स्थापित एक नियामक निकाय है, जो व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं कौशल संबंधी योग्यताओं को विनियमित करने, मानक निर्धारित करने और अनुमोदित करने का कार्य करता है, और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक समग्र निकाय के रूप में कार्य करता है।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि आज का युग कौशल का युग है और जो अध्यापक ज्यादा से ज्यादा कौशल विद्यार्थियों के अंदर पैदा करेगा, उसके उतने ही विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा नौकरी मिलेगी और विश्वविद्यालय का ब्रांड भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक विषय में पढ़ाये जाने का प्रावधान कर लिया गया है। हमारे छात्र इस कोर्स को आंग्लभाषा तथा हिंदी भाषा दोनों ही माध्यमों में पढ़ सकेंगे। उन्होंने आज के कौशल से ओत-प्रोत युवाओं को ही उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाए जाने का आधार बताया।

मुक्त विवि के मीडिया प्रभारी डॉ प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि समारोह के प्रारंभ में कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ त्रिविक्रम तिवारी तथा धन्यवाद ज्ञापन समाज विज्ञान विद्या शाखा के निदेशक प्रोफेसर एस कुमार ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी श्रीमती पूनम मिश्रा, शिक्षक एवं शोध छात्र आदि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र