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अर्चक (पुरोहित) ही राष्ट्र को संगठित कर सकते हैं : अरुण नेटके

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अर्चक (पुरोहित) ही राष्ट्र को संगठित कर सकते हैं : अरुण नेटके


मुरादाबाद, 27 मार्च (हि.स.)। इस राष्ट्र को संगठित करने का काम अगर कोई कर सकता है वह सिर्फ अर्चक (पुरोहित) ही हैं। प्राचीन समय में चार कोस तक एक ही मंदिर हुआ करता था, इतने अधिक मंदिर नहीं हुआ करते थे l यह बातें शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद मुरादाबाद महानगर द्वारा आयोजित मंदिर प्रबंधन समिति एवं अर्चक पुरोहित समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में विहिप के केंद्रीय सह मंत्री व केंद्रीय मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख अरुण नेटके ने कही।

चुनरिया स्थित एक होटल में आयोजित समारोह में अरुण नेटके ने कहा कि आज काफी संख्या में हमारे देश में मंदिर हैं। मैं सभी मंदिरों के पुरोहितों से आहवान करता हूं कि अपने सभी सनातन परिवारों को पूजा की विधि विधान, किस प्रकार से भोग लगाना है और किस समय लगाना है, पूजा के समय आरती और मंत्रों का भी ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। जो एक मंदिर का अर्चक ही सिखा सकता है। इसलिए प्रत्येक अर्चक का यह परम उद्देश्य होना चाहिए कि वह अपने सनातन धर्म की पूजा पद्धति को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करें।

इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य व राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित आचार्य डा जगदीश प्रसाद कोठारी, मठ मंदिर समिति के अध्यक्षों व पुरोहितों और गुरुद्वारा प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के महानगर अध्यक्ष अमित गुप्ता और विहि महानगर मंदिर अर्चक पुरोहित सम्पर्क प्रमुख अनिल कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल